आठवीं तक की है पढ़ाई
मेहताब ने बताया कि वह रामपुर की रहने वाली हैं और उन्होंने आठवीं तक पढ़ाई की है। उनके परिवार में छह भाई-बहन हैं। उनके मुताबिक, मुरादाबाद के रहने वाले जागेश पुरी काम के सिलसिले में उनके गांव आते थे। इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई। बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और दोनों के बीच प्रेम संबंध हो गया।
धर्म आ रहा था आड़े
मेहताब ने बताया कि उन्होंने जागेश से शादी करने की इच्छा अपने परिवार के सामने रखी थी, लेकिन अलग-अलग धर्म होने के कारण परिजन इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद दोनों ने साथ रहने और शादी करने का फैसला किया। मेहताब ने बताया कि वह पांच साल से हिंदू धर्म को मान रही है और भोले की पूजा करती रही है। अब मेहताब, जागेश के साथ बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम पहुंचीं और आचार्य केके शंखधार से विवाह कराने का आग्रह किया।
धर्म परिवर्तन कर ममता रखा अपना नाम
आश्रम में आचार्य ने दोनों से बातचीत की और उनकी बालिग होने से संबंधित प्रमाणपत्र देखे। इसके बाद मेहताब ने धर्म परिवर्तन कर अपना नाम ममता रख लिया। धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया के बाद दोनों का हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह कराया गया। विवाह के दौरान दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने की सहमति जताई।
'नहीं हुई जोर जबरदस्ती'
शादी के बाद मेहताब ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन पर किसी तरह का दबाव या जोर-जबरदस्ती नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि वह अपनी मर्जी से जागेश के साथ शादी कर रही हैं और आगे का जीवन उनके साथ बिताना चाहती हैं। वहीं, जागेश पुरी ने भी मेहताब का जीवनभर साथ निभाने की बात कही।