बाजारों में टॉयलेट बनाए जाने को लेकर व्यापारी अमर उजाला के साथ खड़े हो गए हैं। बुधवार को उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष शोभित सक्सेना की अगुवाई में व्यापारियों ने डीएम से मिलकर उन्हें ज्ञापन दिया। उनकी मांग है कि स्वच्छता अभियान के तहत शहर के मुख्य बाजारों में टॉयलेट बनवाए जाएं। डीएम ने व्यापारियों को आश्वासन दिया है कि वह नगर निगम के अफसरों से बात करके इस समस्या का समाधान कराएंगे।
बुधवार को व्यापार मंडल के महामंत्री देवेंद्र जोशी, पोपिंदर सिंह बख्शी, जतिन अरोड़ा, हरीश अरोड़ा, वैभव मिश्रा, योगेंद्र सक्सेना, सोनू गुजराल और अमर जीत सिंह बख्शी आदि व्यापारियों ने डीएम से मिलकर दिए ज्ञापन में कहा कि व्यापार मंडल हमेशा प्रशासन का सहयोग करता रहा है। शहर को स्वच्छ रखने के लिए भी हम प्रशासन के साथ हैं। शहर के मुख्य बाजारों में टॉयलेट न होने के तमाम दिक्कतें हो रही हैं। महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशान होना पड़ता है। दुकानदार टॉयलेट के लिए भटकते रहते हैं। कई गलियों को मजबूरी में बतौैर टॉयलेट इस्तेमाल करना शुरू कर दिया गया है। स्वच्छता अभियान के तहत बाजारों में टॉयलेट बनवाए जाएं। नगर निगम जमीन मुहैया करा दे तो व्यापारी भी कुछ टॉयलेट बनवाने को तैयार हैं। इसके लिए व्यापारियों के साथ बैठक करके टॉयलेट बनाने के स्थानों का चयन कर लिया जाए। डीएम ने कहा कि व्यापारियों की समस्या जायज है। उन्होंने व्यापारियों से टॉयलेट बनाए जाने वाले स्थानों की सूची मांगी है। डीएम ने कहा कि नगर आयुक्त से बात करके पहले बाजारों में स्थान देख लिए जाएं। इसके बाद जल्द ही बाजारों में टॉयलेट बनवाने का काम शुरू कराएंगे।
जमीन मिलते ही 10 स्थानों पर एसी टॉयलेट बनेंगे
गिरजा सामाजिक सेवा संस्थान नाम की संस्था ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर कमिश्नरी में एसी टॉयलेट बनाया है। संस्था के सचिव नवीन कुमार शर्मा ने बताया कि बरेली जंक्शन, बटलर प्लाजा के पास, पंजाबी मार्केट, घंटा घर के पास, डेलापीर नवीन मंडी, सेटेलाइट बस अड्डा, बड़ा बाजार, इम्पीरियल सिनेमा के पास, चौपुला चौराहा और कोतवाली के पास दस स्थानों पर पीपीपी मॉडल पर ही हमें एसी टॉयलेट बनाने हैं। चार स्थानों पर जमीन मिल गई है। बाकी के लिए जमीन दिलाने के लिए वह नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं होता है।
स्कूलों में टॉयलेट पर सख्ती बना रही बच्चों को बीमार
- ज्यादा बार टॉयलेट जाने पर डांट पड़ने के डर से बच्चों को करना पड़ता है कंट्रोल
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
स्कूलों में ज्यादा बार टॉयलेट जाने वाले बच्चों को टीचर सख्त नजरों से देखते हैं। शिक्षक मानते हैं कि टॉयलेट के नाम पर बच्चे पूरे स्कूल में घूमते हैं। लेकिन कई बार यह सख्ती बच्चों को परेशानी में डालती है।
सुरेश शर्मा नगर की निवासी राधिका ने बताया कि आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले उनके बेटे प्रत्युष के पेट में दर्द रहने लगा है। उन्हें प्रत्युष ने बताया कि टॉयलेट जाने के लिए क्लास में दो पास हैं। एक समय में एक क्लास से सिर्फ दो बच्चे ही पास लेकर टॉयलेट जा सकते हैं, इसलिए वह कई बार टॉयलेट कंट्रोल कर लेता है। पब्लिक स्कूलों में ये हाल आम है। एक गर्ल्स कॉलेज की छात्रा उजबा बताती हैं कि टॉयलेट गंदा रहता है, जिस कारण वह घर आकर ही टॉयलेट जातीं हैं। 11वीं की प्राची बताती हैं कि असेंबली के समय कई बार उन्हें बहुत देर के लिए टॉयलेट रोकनी पड़ती है। कई अभिभावकों ने बताया कि स्कूल से घर आकर बच्चा तुरंत टॉयलेट की ओर भागता है। कई ने यह भी शिकायत की कि स्कूलों में छुट्टी के समय टॉयलेट में ताला डाल दिया जाता है, जिस कारण बच्चे घर आने तक टॉयलेट कंट्रोल करते हैं।
प्राइमरी स्कूलों में हालत बहुत खराब
प्राइमरी स्कूलों में शौचालय की समस्या गंभीर है। शहर में 41 से अधिक ऐसे स्कूल हैं, जिनमें शौचालय ही नहीं हैं। बच्चे अपने घर पहुंच कर टॉयलेट जाते हैं।
कोट...........
कक्षा एक से लेकर दसवीं तक के बच्चों में बिस्तर गीला करने जैसी बीमारी का बड़ा कारण स्कूल समय में टॉयलेट रोकना है। इसके अलावा गंदे टॉयलेट का इस्तेमाल करने के कारण मूत्र के रास्ते में संक्रमण होता है, इससे लड़कियां ज्यादा प्रभावित होती हैं। डॉ. राजेश अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ
गांधी उद्यान में भी गंदे हैं टॉयलेट, मार्निंग वाकर्स परेशान
बरेली। गांधी उद्यान में हर दिन पांच सौ से ज्यादा लोग टहलने या घूमने के लिए जाते हैं। यहां महिला और पुरुषों के लिए एक-एक शौचालय है, लेकिन पानी का इंतजाम न होने से लोग परेशान रहते हैं। टॉयलेट के पास एक ड्रम में पानी इकट्ठा करके रख दिया जाता है, जिसे इमरजेंसी पर ही कोई इस्तेमाल करता है। मार्निंग वॉकर उर्मिला ने बताया कि टॉयलेट गंदा रहने के कारण बहुत परेशानी होती है। हैंडपंप महीनों से पड़ा है, जिसे आज तक सही नहीं कराया गया।