दवाई के धंधे में जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। जिले में फार्मासिस्ट और ड्रग लाइसेंस के बिना एक हजार से अधिक दुकानें चल रही हैं। न केवल ड्रग लाइसेंस के बिना मेडिकल स्टोर चल रहे हैं बल्किग गांवों और कस्बों में दवा की दुकानों पर मरीजों का इलाज भी किया जा रहा है। कार्रवाई के नाम पर औषधि प्रशासन चुप्पी साधे हुए है।
जिले में रिटेल कारोबार के लिए 1591 ड्रग लाइसेंस हैं। फार्मासिस्टों की संख्या साढ़े करीब साढ़े चार सौ है जिनमें 74 सरकारी सेवा में हैं। जिले में मेडिकल स्टोरों की संख्या ढाई हजार से ज्यादा है। यानी एक हजार से अधिक मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के चल रहे हैं। कई फार्मासिस्ट ने अपने आप को एक से अधिक दुकानों के साथ अटैच कर रखा है। बीते एक साल में औषधि प्रशासन की टीम ने केवल एक कार्रवाई की। अक्तूबर में भोजीपुरा के अभयपुरा में चल रहे फर्जी मेडिकल स्टोर पर छापा मारकर दवाएं सील की थीं। संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद फर्जी मेडिकल स्टोरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
इन इलाकों में चल रहे फर्जी मेडिकल स्टोर
बहेड़ी में ग्राम भुड़िया, मुड़िया नवी बख्श, भिलैया अड्डा, बंजरिया, नरायननगला, कुंडरा कोठी और बहेड़ी कस्बा, बिथरी चैनपुर इलाके के उड़ला जागीर, रामनगर उर्फ मोहनपुर, केसरपुर, कुआडांडा, नरियाबल, बिथरी में हैं। सीबीगंज क्षेत्र के जौहरपुर, गौंतारा, चंदपुर काजियान व जोगियन, सरनिया, बिधौलिया, महेशपुर, नदोसी, खड़ौआ, मथुरापुर, बंडिया में मेडिकल स्टोर बगैर लाइसेंस के संचालित हैं। इनके अलावा भोजीपुरा, आंवला, नवाबगंज, क्योलड़िया, शेरगढ़, शीशगढ़, मीरगंज, भमोरा, फरीदपुर इलाके में फर्जी मेडिकल स्टोर चल रहे हैं।
पांच साल की सजा का प्रावधान
बगैर लाइसेंस के मेडिकल स्टोर पर छापा मारने के समय दवाएं सीज करते हैं। संदिग्ध दवाओं के सैंपल लिए जाते हैं। फिर मुकदमा दर्ज कराया जाता है। बिना लाइसेंस दवाओं की चलाते पकड़े जाने पर पांच साल की सजा और सीज दवाओं की कीमत का पांच गुना तक जुर्माने का प्रावधान है।
ऐसे बनता है ड्रग लाइसेंस
रिटेल मेडिकल स्टोर के लिए हाईस्कूल पास व्यक्ति अर्ह हैं। उन्हें शैक्षिक प्रमाण पत्र, फार्मासिस्ट का डिप्लोमा, दुकान का एग्रीमेंट व नक्शा के साथ फार्म 19 भरना होता है। लाइसेंस फीस के लिए तीन हजार रुपये का चालान लगता है। ड्रग इंस्पेक्टर के सर्वे के बाद सहायक आयुक्त औषधि लाइसेंस जारी करते हैं।
शासन एवं उच्चधिकारियों के आदेश और शिकायत पर छापामार कार्रवाई की जाती है। चेकिंग की जाती है। कहीं बगैर लाइसेंस के मेडिकल स्टोर चलता मिलेगा तो कार्रवाई की जाएगी।
नवनीत कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर