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Bareilly News: अव्यवस्था के तीर से छिटक रहे पदक

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बरेली। जिले के तीरंदाज राइफल क्लब में असमतल मैदान पर घास-फूस के बीच अभ्यास कर रहे हैं। इस वजह से उनको अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। प्रदेश स्तर पर कई स्वर्ण जीतने वाले तीरंदाज भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में एक अदद पदक के लिए तरस रहे हैं। दूसरी ओर, अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वह मैदान पर उगी घास को कटवाने तक की जहमत नहीं उठाना चाहते हैं।
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पुरानी जेल रोड पर राइफल क्लब में बने आर्चरी ग्राउंड में दो बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुकीं अवनी, बिजनौर की शैली, दीपांशी, ऑल इंडिया 13वीं रैंक हासिल करने वाली अक्दाश प्रशिक्षण ले रहीं हैं। वर्ष 2024 में प्रदेश स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाले बीकॉम के छात्र स्पर्श भी यहां पसीना बहा रहे हैं। इन खिलाड़ियों का कहना है कि अगर घास कटवाकर मैदान को समतल करा दिया जाए तो उनको प्रशिक्षण में काफी आसानी होगी। वह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे।



दो लाख के धनुष का खुद करना होता है इंतजाम



आर्चरी के लिए इस्तेमाल होेने वाले धनुष की कीमत दो लाख से अधिक होती है। तीरंदाजों को खुद ही इसका इंतजाम करना होता है। तीर सेे लेकर अन्य सुविधाओं पर हर माह लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद उनको ग्राउंड पर व्याप्त अव्यवस्था से दो-चार होना पड़ता है।
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बिजनौर से आकर बरेली में अभ्यास कर रहीं शैली


बिजनौर की शैली काफी समय से बरेली में रहकर आर्चरी का अभ्यास कर रहीं हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में प्रदेश स्तर पर 60 मीटर आर्चरी में रजत पदक हासिल किया था। इसके अलावा उन्होंने गुजरात में राष्ट्रीय स्तर की दो प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग किया है। अव्यवस्था की वजह से उनको भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संवाद


मैदान पर मिट्टी डलवा दी गई थी। अभी वहां कुछ निर्माण होना है। इस वजह से कार्य रुका हुआ है। मैदान के रखरखाव के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। – कमल सेन, खेल सचिव, बरेली राइफल क्लब
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