बरेली। एक समय था जब खेलों को महज जीत, हार और पदकों तक सीमित समझा जाता था, लेकिन बदलते दौर में खेलों की परिभाषा बदल गई है। अब खेल केवल शौक या प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि एक सशक्त कॅरिअर का विकल्प बनकर उभरा है। मैदान पर प्रदर्शन के साथ-साथ कोचिंग, फिटनेस ट्रेनिंग, खेल प्रबंधन और खेल कोटे के जरिए सरकारी सेवाओं में भी युवाओं के लिए व्यापक अवसर तैयार हो रहे हैं। जिले के कई युवा खिलाड़ी इसी सोच के साथ अपने भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं।
- ग्वालियर से कर रही हैं बीपीएड
संजय नगर निवासी मनीषा गंगवार क्रिकेट में अपना कॅरिअर संवार रही हैं। वह वर्तमान में ग्वालियर से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) की पढ़ाई कर रही हैं और प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। वर्ष 2024 में टी-20 विश्व कप के दौरान उन्होंने शैफाली वर्मा की आक्रामक बल्लेबाजी देखी, जिससे उनका रुझान क्रिकेट की ओर बढ़ा। कुछ समय पेशेवर तौर पर खेलने के बाद उन्होंने कोचिंग को कॅरिअर के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। बैटिंग ऑलराउंडर के रूप में खेलते हुए वह मानती हैं कि बीपीएड की पढ़ाई उन्हें भविष्य में एक सफल कोच बनने में मदद करेगी।
- एनआईएस पटियाला से कर रहे हैं पढ़ाई
रोड नंबर-7 निवासी राजेश यादव एथलेटिक हैं। वह 800 और 1500 मीटर दौड़ के साथ पांच किलोमीटर मैराथन में भाग लेते हैं। खेलों में आने का उनका उद्देश्य इंडियन आर्मी में चयन पाना था। बेहतर प्रशिक्षण के लिए वह एनआईएस पटियाला से तैयारी कर रहे हैं। राजेश राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं। उनका मानना है कि खेल न केवल शारीरिक मजबूती देता है, बल्कि अनुशासन और आत्मविश्वास भी सिखाता है, जो सेना और अन्य सरकारी सेवाओं में चयन के लिए बहुत आवश्यक है।
- आर्मी में भर्ती की तैयारी कर रहे सत्यम
शास्त्री नगर निवासी सत्यम सिंह पिछले करीब डेढ़ वर्ष से आर्मी में भर्ती के लिए तैयारी कर रहे हैं। वह शूटिंग और एथलेटिक्स दोनों में सक्रिय हैं। उनके पिता सेना में मेजर पद पर कार्यरत थे और परिवार की प्रेरणा से ही उन्होंने खेल को अपने कॅरिअर का आधार बनाया। सत्यम खेल कोटे के माध्यम से सेना में चयन चाहते हैं। उनकी लिखित परीक्षा सफल हो चुकी है और अब उन्हें फिजिकल उत्तीर्ण करना है। उनका कहना है कि सेना में भर्ती होने के बाद भी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने और देश का नाम रोशन करने के लिए पर्याप्त अवसर मिलते हैं।