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UP: 'इस वजह से आजम खां को किया जा रहा परेशान'; मौलाना का अखिलेश के बयान पर पलटवार, कह दी बड़ी बात

Fri, 20 Oct 2023 04:38 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ्ती मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक बार फिर सपा मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। मौलाना ने कहा कि अखिलेश यादव मुसलमानों के हितैषी नहीं हैं। मुसलमानों को अब दूसरे विकल्प पर विचार करना चाहिए। 
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अखिलेश यादव पर मौलाना शहाबुद्दीन ने दिया बयान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ्ती मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि सपा नेता आजम खां मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। मुस्लिम कौम उनके साथ खड़ी है। मौलाना ने आजम खां की गिरफ्तारी पर अखिलेश यादव के उस बयान की निंदा की, जिसमें सपा मुखिया ने कहा था कि आजम को मुसलमान होने की वजह से उनको परेशान किया जा रहा है। 

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मौलाना ने कहा कि आजम खां मुसलमान होने की वजह से नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी में होने की वजह से परेशान किया जा रहा है। अखिलेश यादव अपनी नाकामियों को छिपाने और आजम खां का समर्थन न कर पाने की वजह से मुसलमान शब्द इस्तेमाल करके पूरी कौम के सिर ठिकरा फोड़ना चाहते हैं। शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि अखिलेश की बिरादरी से आजम खां नहीं आते हैं, इसलिए सपा मुखिया उनके समर्थन में नहीं खड़े हैं। जबकि दूसरी तरफ वो देवरिया पहुंच गए। वहां पीड़ित परिवार उनकी ही बिरादरी से संबंध रखता है। 

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'सपा अब मुसलमानों के रहने की जगह नहीं'
शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि लोकसभा चुनाव बहुत जल्द होने वाले हैं। मुसलमानों की एक बड़ी तादाद इस असमंजस में है कि वोट किसको दिया जाए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी में मुसलमानों के रहने की जगह अब नहीं है। जब तक मुलायम सिंह यादव नेतृत्व कर रहे थे उस वक्त तक सपा में मुसलमानों की गुंजाइश थी। वो मुसलमानों के हितैषी थे, मगर जब से अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी की कमान संभाली है उसके बाद मुसलमानों के बड़े चेहरों को हाशिये पर कर दिया गया है। 
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मौलाना ने कहा कि ऐसी सूरतेहाल में मुसलमान समाजवादी पार्टी को छोड़ दें और अब ये रहने की जगह नहीं है। दूसरे विकल्पों पर विचार करें। मुसलमानों ने पिछले विधानसभा और लोकसभा में समाजवादी पार्टी को पूरी ताकत और मजबूती के साथ वोट देकर अखिलेश यादव की इज्जत बचाई, मगर जब भी मुसलमानों को उनकी जरूरत पड़ी तो वो साथ खड़े नजर नहीं आए। इसलिए अब मुसलमानों को दूसरे विकल्प पर विचार करना होगा और नए सिरे से अपनी लॉबिंग करना होगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में ही नई रणनीति के साथ शुरुआत होनी चाहिए। 
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