इस आदेश से पूरे प्रदेश में बनने वाले छोटे-छोटे मदरसों की मान्यताएं खत्म हो गईं। 2016 और 2017 में एक भी मदरसे को मान्यता नहीं दी गई। इससे पहले 2014 और 2015 में भी जिन मदरसों ने जो फाइलें अल्पसंख्यक विभाग में जमा की थीं उन पर विचार करने के बजाय सब निरस्त कर दी गईं। पूर्व की सपा सरकार मदरसों की बर्बादी और नाकामी की जिम्मेदार है।
मान्यता देने का सिलसिला शुरू करने की मांग
शहाबुद्दीन रजवी ने योगी सरकार से मांग की है कि जिला स्तर पर मदरसों के तहतानिया और फोकानिया दर्जे की मान्यता का सिलसिला शुरू करें। जो बड़े मदरसे हैं, उनको भी आलिया और उच्च आलिया की मान्यता दी जाए। सर्वे शुरू होने के समय योगी सरकार के कई मंत्रियों ने सार्वजनिक मंचों पर इस बात का एलान किया था कि मदरसों की तरक्की और छात्रों के कल्याण के लिए सरकार सर्वे करा रही है।
मौलाना ने कहा कि कई साल का समय गुजर गया, मगर अभी तक मदरसा एजुकेशन के संबंध में कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई जा सकी है। इसलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कैबिनेट मंत्री धर्मपाल साथ ही राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी और मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ इफ्तखार ज़ावेद से गुजारिश है कि मदरसों की मान्यता देने का सिलसिला शुरू किया जाएं ताकि मदरसों में पढ़ने वाले छात्र व छात्राओं का भविष्य उज्जवल हो सके।