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मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले: टिकट बंटवारे में मुसलमानों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं; अखिलेश यादव पर बरसे

Sun, 03 Mar 2024 05:14 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने आगे कहा कि सपा ने मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया। मुसलमानों के लिए बुनियादी तौर पर कोई काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव नरम हिंदुत्व की राह पर चल रहे हैं। 
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मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि मुसलमानों के कंधों पर सवार होकर वोट बैंक की राजनीति करने वाले राजनीतिक दल मुसलमानों को उनकी आबादी के हिसाब से लोकसभा में प्रत्याशी के तौर पर टिकट दें। उन्होंने कहा कि अगर अनदेखी की तो मुसलमान बर्दाश्त नहीं करेगा। अब मुसलमान सियासी और समाजी तौर पर जागरूक हो गया है। 

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उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अक्सर ये देखा गया है कि जिनकी आबादी छह फीसदी है, समाजवादी पार्टी उस बिरादरी से संबंध रखने वाले लोगों को सबसे ज्यादा टिकट देती है। दूसरी तरफ सबसे बड़ी आबादी जिसका वोट प्रतिशत 22 फीसद है, उसको सपा सबसे कम टिकट देती है, मगर अब हम ऐसा नहीं होने देंगे।

अखिलेश पर बरसे मौलाना 
मौलाना ने कहा कि सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव इन बातों का ध्यान रखते थे। हर आबादी के हिसाब से विधानसभा और लोकसभा में टिकटों का वितरण करते थे। मगर जब से सपा का नेतृत्व अखिलेश यादव करने लगे तब से सपा ने अपनी सोच में काफी हद तक बदलाव पैदा किया है। अखिलेश यादव नरम हिंदुत्व की लाइन पकड़ कर चल रहे हैं। यही वजह है कि हर चुनाव में उनको हार का मुंह देखना पड़ रहा है। मुलायम सिंह ने कभी भी नरम हिंदुत्व की तरफ कदम नहीं बढ़ाया जिसकी वजह से उनको कामयाबी मिलती रही है।

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शहाबुद्दीन रजवी ने आगे कहा कि सपा ने मुसलमानों को सिर्फ एक वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया। मुसलमानों के लिए बुनियादी तौर पर कोई काम नहीं किया। जब अखिलेश यादव को मुसलमानों ने मुख्यमंत्री बनाया। अखिलेश ने अपने दौरे में मुसलमानों की तरफ से मुंह फेर लिया। नौकरियों में मुस्लिम नौजवानों को जगह नहीं दी गईं। मदरसों की मान्यताएं बंद की गईं और पूरे पांच साल के शासनकाल में किसी भी एक मदरसे को अनुदान सूची में नहीं लिया गया। इसी तरह और बहुत सारे मुद्दे ऐसे हैं जिसमें अखिलेश यादव ने मुस्लिम नौजवानों को नजरअंदाज किया है।

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