मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि वह हिजाब के मुद्दे पर जेएनयू की कुलपति के बयान का समर्थन करते हैं। देश के संविधान ने हर व्यक्ति को इसकी आजादी दी है कि वो अपनी पसंद के मुताबिक कपड़े पहने और खाना खाए।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने हिजाब के मुद्दे पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) दिल्ली की कुलपति शांति श्रीडी पंडित के बयान का समर्थन किया है। मौलाना ने कहा कि वह जेएनयू की कुलपति के बयान का समर्थन करते हैं।
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उन्होंने कहा कि हिजाब मुस्लिम महिलाओं का एक मजहबी लिबास है। इस लिबास पर हमेशा सांप्रदायिक ताकतें आपत्ति करती रहती हैं। भारत में विभिन्न धर्मों और संप्रदाय के लोग रहते हैं, वो अपनी पसंद के मुताबिक खाना खाते और लिबास पहनाते हैं। बिल्कुल इसी तरह प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मजहबी लिबास पहनते हैं, मगर भारत के मुसलमानों ने कभी इस बात पर ऐतराज नहीं जताया है।
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मौलाना ने कहा कि देश के संविधान ने हर व्यक्ति को इसकी आजादी दी है कि वो अपनी पसंद के मुताबिक कपड़े पहने और खाना खाए लेकिन चंद फिरकापरस्त लोग हमेशा हिजाब को मुद्दा बनाते हैं।
बता दें कि जेएनयू की कुलपति ने कहा था कि भारत में धर्म, भाषा और ड्रेस कोड में एकरूपता कारगर नहीं है। अगर कोई छात्रा हिजाब पहनना चाहती है, तो यह उसकी पसंद है और उसे इसकी अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि शिक्षण संस्थानों को व्यक्तिगत पसंदों का सम्मान करना चाहिए।