मौलाना ने कहा कि समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट जिन जिन राज्यों में बनाया जा रहा है, वो सिर्फ एक ही राज्य का मॉडल है। जबकि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग मुद्दे हैं। अलग-अलग धर्मों के मानने वालों की जनसंख्या है। इसलिए एक राज्य का मॉडल सभी राज्यों पर लागू नहीं किया जा सकता।
'नार्थ ईस्ट के राज्यों में आएगी चुनौती'
मौलाना ने कहा कि यूसीसी को लागू करने में सबसे बड़ी समस्या नार्थ ईस्ट के राज्यों में आएगी, क्योंकि नगालैंड में नगा समुदाय, मिज़ोरम में मिज़ोरम समुदाय और दूसरे जन जाति समुदाय को यूसीसी के दायरे में नहीं लाया जा सकता। इन राज्यों में अपने अलग-अलग कानून ढांचे वर्षों से स्थापित हैं और इनको संविधान भी संरक्षण देता है। इसलिए इनसे छेड़छाड़ करना अच्छा नहीं होगा।