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UP: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बड़ा बयान, कहा- ऐसे कथावाचकों और मौलवियों का बहिष्कार करें लोग

Tue, 01 Jul 2025 01:07 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने पहली बार सपा प्रमुख अखिलेश यादव का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग धर्म के नाम पर धंधा कर रहे हैं। मोटी रकम लेकर कार्यक्रम में आते हैं। ऐसे कथावाचकों, मौलवियों व शायरों का बहिष्कार करना चाहिए।  
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मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कथावाचकों के बारे में जो कुछ कहा, वह उनकी बात सौ फीसदी सही है। मौलाना ने कहा कि वह अखिलेश यादव के समर्थक नहीं हैं, मगर उन्होंने दिल और दिमाग से सच्ची बात कही है। समाज को आईना दिखाने वाली बात है। बता दें कि इटावा विवाद को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा था कि कई कथावाचक हैं जो 50 लाख रुपये लेते हैं। किसी की हैसियत है कि धीरेंद्र शास्त्री को कथा के लिए अपने घर बुला ले। 

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मौलाना ने कहा कि मौजूदा समय में गरीब आदमी को कोई धार्मिक आयोजन कराना बहुत मुश्किल और महंगा पड़ता है। हिंदुओं के कार्यक्रम को संबोधित करने के लिए कथावाचकों को बुलाया जाता है। इसी तरह मुसलमानों के कार्यक्रम में तकरीर के लिए मौलवी को बुलाया जाता है। शहरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए मुशायरे आयोजित होते हैं, उसमें हिंदू-मुस्लिम शायर बुलाए जाते हैं। ये लोग कार्यक्रम में पहुंचने से पहले अपने अकाउंट में पैसा डलवाते हैं, फिर जाते हैं। इसके लिए अपने निजी सचिव तक रख रखे हैं।  

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धर्म के नाम पर धंधा कर रहे लोग- मौलाना 
मौलाना ने कहा कि यह लोग धर्म के नाम पर दुनियादारी कर रहे हैं। अपने चेहरे और लिबास पर धर्म का टाईटल लगा रखा है। धर्म की आड़ में न जाने कौन-कौन से दुनियादारी के काम अंजाम दे रहे हैं। इनका दावा है कि हम धर्म का प्रचार प्रसार और सेवा कर रहे हैं। इनका दावा खोखला और समाज को धोखा देने वाला है। ये लोग धर्म के सेवक नहीं बल्कि धर्म की आड़ में अपने परिवार की सेवा में लगे हुए हैं।
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शहाबुद्दीन रजवी ने हिंदू और मुस्लिम लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि ऐसे कथावाचकों, मौलवियों और शायरों को अपने कार्यक्रमों में न बुलाए, बल्कि इनका बहिष्कार करें। हां कुछ लोग अच्छे भी हैं, जो कथा और तकरीर करने के रुपये तय नहीं करते हैं, वो लोग जरूर धर्म के सेवक हैं। ऐसे अच्छे लोगों को अपने कार्यक्रमों में बुलाए। ताकि समाज में अच्छा पैगाम जाए। 

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