मौलाना ने कहा कि जुलूस-ए मोहम्मदी बहुत पाक और साफ जुलूस है। इसी दिन यानी 12 रबी अव्वल शरीफ को पैगंबर-ए-इस्लाम पैदा हुए थे। इसलिए इस दिन पूरी दुनिया के मुसलमान खुशी मनाते हैं। मगर इस दिन पाकीज़गी ( महत्वपूर्णता) का ख्याल नहीं रखते।
तमाम मुसलमानों से अपील है कि जो झंडे अपने घरों में लगाते हैं, उसके साथ ही तिरंगा झंडा भी लगाएं। जुलूसों के दरम्यान लगने वाले नारों पर भी ध्यान रखें। बुजुर्गे द्वारा प्रचारित किए गए नारे ही लगाएं। उन्होंने पैगंबर-ए-इस्लाम ने पूरी दुनिया को मोहब्बत, अमन व शांति का पैगाम दिया है। जुलूस में शिरकत करने वाले लोग नमाज का एहतमाम करें। जुलूस में औरतें और छोटे बच्चे न आएं।