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कुतुबखाना फ्लाईओवर: शुरूआती सर्वे में ही उलझ गया सेतु निगम

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कुतुबखाना। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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जितनी चौड़ी जगह उतनी ही जगह चाहिए पिलर के लिए बेस बॉक्स लगाने में
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सेतु निगम के सर्वे में दो जगह नौ मीटर से भी कम सड़क की चौड़ाई

बरेली। श्यामगंज के मुकाबले कुतुबखाना रोड पर फ्लाईओवर बनाना कठिन है, यह बात पहले से आम लोगों की जुबान पर थी। अब सर्वे शुरू करते ही सेतु निगम भी इसी वजह से उलझ गया है। प्रस्तावित करीब छह सौ मीटर लंबे इस पुल को बनाते समय दो जगह नौ मीटर से कम चौड़ाई होना तो बाधक बनेगा ही, पुल के बीच वाले हिस्से को बनाते वक्त कई भवनों के छज्जे भी दिक्कत खड़ी करेंगे। बिजली लाइन को इस कम चौड़ी सड़क पर भूमिगत करना भी जटिल कार्य होगा, क्योंकि उतना ही चौड़ा बॉक्स लगाकर पिलर तैयार किए जाएंगे।
स्मार्ट सिटी मिशन बोर्ड की बैठक में मंजूरी के बाद अगले ही दिन शनिवार से सेतु निगम ने सर्वे शुरू कर दिया। अभी दो दिन के सर्वे में ही इस पुल के निर्माण में कई परेशानियां सामने आ गई हैं। इनका किसी तरह निराकरण करने पर सेतु निगम ने विचार शुरू कर दिया है, मगर निगम के अफसर खुद मान रहे हैं कि सर्वे कार्य पूरा होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा। तभी तमाम चुनौतियों से निपटने की रणनीति बनेगी। बड़ी परेशानी यह भी है कि बिजली लाइन को भूमिगत कैसे किया जाए। कारण, कुछ जगहों पर सड़कों की चौड़ाई ही सिर्फ नौ मीटर है और इतना ही चौड़ा बेस बॉक्स लगाकर पिलर तैयार किए जाएंगे।
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प्रारंभिक नापजोख के बाद सेतु निगम के अफ सरों ने फ्लाईओवर को कोहाड़ापीर पेट्रोप पंप के पास से शुरू कर कुतुबखाना चौराहा के ऊपर से गुजारते हुए उसका एक हिस्सा जिला पंचायत के पास और दूसरा हिस्सा कोतवाली के पास उतारने को उपयुक्त माना है। सेतु निगम के मुख्य परियोजना प्रबंधक देवेंद्र सिंह ने बताया कि फ्लाईओवर का आधार तैयार करने के लिए नौ से दस मीटर चौड़ाई में सड़क पर खोदाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि सड़क के छह सौ मीटर लंबे हिस्से में तो चौड़ाई नौ मीटर के आसपास है लेकिन दो जगह नौ मीटर से कम जगह है। फिलहाल इस समस्या का समाधान ढूंढा जा रहा है। जिला पंचायत की ओर जो हिस्सा उतरेगा वहां भी नौ मीटर से कम जगह है। इसके अलावा दुकान-मकान और उनके छज्जे भी पुल के निर्माण में बाधा बन सकते हैं। इन सब बिंदुओं के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

कुतुबखाना फ्लाईओवरः यातायात व्यवस्था बेहतर हो, फ्लाईओवर की जरूरत नहीं

बरेली। कुतुबखाना पर एक तरफ सेतु निगम ने फ्लाईओवर निर्माण के लिए सर्वे शुरू कर दिया है, वहीं व्यापारी इस प्रोजेक्ट के विरोध में हैं। व्यापारियों का कहना है कि यहां फ्लाईओवर की जगह जिला प्रशासन अंडरपास के विकल्प पर विचार करें। अंडरपास नहीं बना सकते हैं तो जाम लगने वाली प्रमुख समस्याओं पर काम किया जाए, बाजार में आने वाले बड़े वाहनों को रोका जाए। कहा कि फ्लाईओवर का काम शुरू होते ही बाजार चौपट हो जाएगा। यहां के व्यापारी यह मार नहीं सह सकेंगे। कहा कि मुख्य बाजार में दस मीटर चौड़ी सड़कें भी नहीं हैं, ऐसे में फ्लाईओवर की खोदाई कैसे होगी। जहां नौ मीटर से भी कम जगह हैं वहां खोदाई कैसे होगी और किस तरह से काम किया जाएगा।

व्यापारियों ने दिए सुझाव

यहां फ्लाईओवर बनाने का व्यापारी शुरू से ही विरोध कर रहे हैं। इसके बाद भी प्रशासन लगातार इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। यहां यातायात व्यवस्था को बेहतर किया जाए। टेंपों व ई-रिक्शा को बाजार के अंदर छोटी गलियों में प्रवेश न दिया जाए तो यहां यह सभी स्थितियां बेहतर हो सकती हैं। फ्लाईओवर की जरूरत नहीं है। -वसीम।

कुतुबखाना पर फ्लाईओवर बनाने का मतलब यहां के सैकड़ों व्यापारियों को बर्बाद करना है। पुल निर्माण शुरू होते ही खोदाई शुरू होगी और व्यापार ठप हो जाएगा। कम से कम तीन साल में यह पुल बना पाएंगे और मान लिया जाए कि एक साल में बना भी लेंगे तो एक साल में ही व्यापार चौपट हो जाएगा। प्रशासन हमारी सुनने के बजाय खुद की मनमानी कर रहा है। -फहीम

यहां व्यापार मंडल ने करीब एक महीने तक एक सर्वे कराया था कि यहां से गुजरने वाले कितने लोग बाजार आते हैं और कितनों का मकसद सिर्फ बाजार के रास्ते से जंक्शन या अन्य जगहों पर पहुंचने का होता है। ऐसे में यह बात सामने आई कि सिर्फ तीस फीसदी लोग ही ऐसे हैं कि जो जंक्शन या अन्य कहीं जाने के लिए इस रास्ते का प्रयोग कर रहे हैं। 70 फीसदी लोग बाजार ही आ रहे हैं तो क्या सिर्फ तीस फीसदी के लिए फ्लाईओवर बनाया जाएगा। -पवन अरोरा

यहां फ्लाईओवर निर्माण की शुरूआत के साथ ही बाजार का व्यापारी शून्य पर पहुंच जाएगा। कई व्यापारियों ने बैंक से ऋण ले रखा है। वे सब उन्हें कैसे चुकाएंगे। परिवार के खर्चों को चलाने के लिए यही व्यापार एकमात्र साधन है। ऐसे में यह सब चौपट हो जाएगा। फ्लाईओवर बनने के बाद भी यहां यही स्थिति रहेगी। जिस दुकान के सामने फ्लाईओवर का पिलर आ जाएगा वह दुकानदार तो हरहाल में बर्बाद हो जाएगा। -मोहन लाल

कुतुबखाना पर जाम लगने की मुख्य वजहें

  • - यहां व्यापारियों के आने वाले सामान की लोडिंग व अनलोडिंग हर समय होती है। दिनभर चार-पांच दुकानों के सामने लोडिंग व अनलोडिंग के लिए वाहन खड़े रहते हैं।
  • - हर दुकान के बाहर अतिक्रमण है। दुकानदारों ने करीब दो मीटर तक सड़क सिर्फ कब्जा करके घेर रखी है।
  • - दुकानदारों के अतिक्रमण के बाद यहां खरीदारी करने आए ग्राहक भी वाहनों को दुकान के सामने खड़ा कर देते हैं। इससे जाम की स्थिति हो जाती है।
  • - पार्किंग की व्यवस्था न होना यहां जाम का सबसे बड़ा कारण है।
  • - टेंपो, ई-रिक्शा, कार भी बाजार की छोटी गलियों से गुजरती हैं।

श्यामगंज फ्लाईओवर बनने के बाद भी जाम

बरेली। दो साल पहले श्यामगंज बाजार में बने फ्लाईओवर को व्यापारी अपने लिए अनुपयोगी बता रहे हैं। श्यामगंज के व्यापारियों का कहना है कि उन्हें इसका कोई लाभ नहीं दिख रहा है। जाम अब भी उतना ही लगता है। इसके उलट बाजार में पहले की अपेक्षा अधिक प्रदूषण बढ़ गया है। बोले-प्रशासन बताए कि व्यापारियों को इस पुल का क्या लाभ मिला।

फ्लाईओवर बनने से मुझे यहां आज तक कोई फायदा नहीं दिखाई दिया। हालांकि कोई नुकसान भी नहीं दिखा। हां जाम की समस्या खत्म होने की बात हुई थी वह अब भी वैसे ही बनी हुई है। -रफी अहमद

यहां फ्लाईओवर बनने से कोई राहत नहीं है। पहले जितनी धूल उड़ती थी अब उससे ज्यादा है। पुल के ऊपर से भी धूल आती है। हम यहां दिनभर धूल खाकर जीवन कम कर रहे हैं। रात में गर्म पानी के गरारे न करें तो सांस, खांसी के मरीज हो जाएं। प्रशासन बताए कि व्यापारियों को क्या लाभ हुआ। -विजय कुमार

मुझे तो यहां इस फ्लाईओवर बनने से कोई लाभ नहीं दिखाई दिया। पहले भी जाम लगता था। अब भी जाम लग रहा है। धूल पहले से अधिक है। फ्लाईओवर बनने के बाद नीचे सड़क निर्माण नहीं कराया गया। बड़े वाहनों पर भी कोई रोक नहीं है तो ऐसे में हम व्यापारियों को यहां कोई लाभ अब तक नहीं मिला। -अनूप अग्रवाल।

लाभ तो मिला है। अब लोग जाम में नहीं फंसते हैं। जाम इस कारण लगता है कि दुकानों के बाहर अतिक्रमण है। सड़क पर गड्ढे हैं और बड़े वाहन नीचे से अभी भी गुजर रहे हैं। टेंपो, ई-रिक्शा व बड़े वाहनों के फ्लाईओवर के नीचे आने से गुजरने पर रोक लगाई जाए तो जाम की समस्या से निजात मिल जाएगी। -दुर्गेश खटवानी।

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