होली के लिए बाजार सजकर तैयार है। रंग-गुलाल, पिचकारी और कचरी-पापड़ की खरीदारी शुरू हो चुकी है। इस बार सबसे खास बात यह कि भारतीय पिचकारी की धार चाइना पर भारी पड़ रही है। पिचकारी बाजार में अबकी भारतीय पिचकारियों की धूम है। कीमत भी कम है और क्वालिटी भी बेहतर है। ऊपर से स्वदेशी होने का तमगा भी है। कपड़ा हो या खानपान का सामान, हर दुकान पर खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगी है। कुतुबखाना पर तीन पीढ़ियों से पिचकारी का कारोबार करने वाले इस्लाम बताते हैं कि इस बार होली के लिए बहुत कुछ खास है। गुझिया बनाने के लिए नए डिजाइन का सांचा है। तरह-तरह की पिचकारी, मुखौटे, कलर बम, कलर कैप्सूल और मैजिक बैलून हैं। सबकी अपनी खासियत है। कलर बम चलाएंगे तो गुलाल उड़ेगा, मैजिक बैलून में एक साथ बहुत सारे गुब्बारे तैयार होंगे। पिचकारी की खासियत यह है कि अब सब स्वदेशी हैं। पहले इस बाजार में चाइना का कब्जा था, मगर अब दिल्ली की पिचकारी धूम मचा रही हैं। चाइना के मुकाबले भारत की पिचकारी, मजबूत है और करीब बीस फीसदी सस्ती भी। सिविल लाइंस के खिलौना व्यापारी विनय रेलन बताते हैं कि इस बार ऐसी पिचकारी भी आई हैं जो गुलाल उड़ाएंगी।
भाजपा की सरकार, केसरिया गुलाल की डिमांड
रंग के थोक कारोबारी धन्नू भाई की तीसरी पीढ़ी इस कारोबार में हैं। बोले, अब तो लोग हर्बल रंगों की ही मांग ज्यादा करते हैं। मगर इस बार केसरिया गुलाल सबसे खास है। नगर से लेकर केंद्र तक भाजपा की सरकार है इसलिए काफी ढूंढकर मंगाया है क्योंकि विधानसभा चुनाव में इस रंग की डिमांड आई थी।
फ्लेवर्ड कचरी का भी लीजिए आनंद
कचरी-पापड़ के बाजार में भी जोरदार तैयारी है। विक्रेता हरीश बताते हैं कि इस बार कचरी कई स्वाद में उपलब्ध है। लहसुन, हरी मिर्च, लाल मिर्च, काली मिर्च और जीरे का फ्लेवर खास है। डिजाइन भी कई हैं। यह सब कचरी गुजरात से बनकर आती है। कीमत भी बहुत ज्यादा नहीं, सबके बजट में है। 40 रुपये से लेकर 150 रुपये किलो भाव पर खरीदा जा सकता है। यह सब साबूदाना, अरारोट, सूजी और मैदा से बनाई गई हैं।
बजट के हिसाब से मेवा का हार
होली पर लोग दामाद और बच्चों को मेवा के हार भी पहनाते हैं। मेवा (ड्राई फ्रूट) कारोबारी संजय आनंद बताते हैं कि होली पर मेवा और चॉकलेट के हार की खूब डिमांड होती है। 160 रुपये से लेकर 800 रुपये तक के हार हर समय तैयार रहते हैं। इससे बड़े हार लोग ऑर्डर देकर तैयार कराते हैं, जिसमें उनकी पसंदीदा चॉकलेट, मेवा और गोला लगा होता है। लोगों की जरूरत के मुताबिक छोटे-छोटे पैकेट में भी मेवा उपलब्ध है।
छोटे से बाजार में अच्छीखासी भीड़
जिला अस्पताल के सामने स्थित इंदिरा मार्केट में आमतौर पर साधारण तबके के लोग ही कपड़ों की खरीदारी को पहुंचते हैं। ब्रांडेड कपड़ों के शोरूम इनकी पहुंच से दूर हैं। मगर इंदिरा मार्केट अपने ग्राहकों से गुलजार है। यहां जमकर भीड़ उमड़ रही है। लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं। ऐसा ही हाल जिला अस्पताल रोड किनारे फड़ पर लगने वाले जूता-चप्पल के बाजार का है। यहां भी खूब भीड़ है। यहां के सामान पर ब्रांड का तमगा नहीं है लेकिन चमक-दमक और डिजाइन में किसी से कम नहीं हैं।