नेता जी के बेटे की शादी है सो शहामतगंज से सेटेलाइट होते हुए सुरेश शर्मा नगर तक सड़क पर बने डिवाइडर तक की धुलाई सर्फ से हो गई। हालांकि इसमें बहाना बना मुख्यमंत्री का संभावित दौरा, जो शनिवार रात तक तय नहीं हुआ। ट्राली में सीमेंट-ईंट लेकर घूम रही नगर निगम की टीम ने टूटे हिस्सों की मरम्मत की और लोक निर्माण विभाग का अमला सड़कों पर पैचवर्क कराता रहा। दिन में भी स्ट्रीट लाइट जल रही थी। सुपरवाइजर भी मजदूरों के साथ जुटा हुआ था। शहामतगंज से सेटेलाइट तक महज एक मजदूर धुलाई में लगा था जबकि सुरेश शर्मा नगर के आसपास मजदूरों की टोली जीजान से काम में लगी थी।
बताते चलें कि सपा के जिलाध्यक्ष और पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव सुरेश शर्मा नगर में रहते हैं और 25 जनवरी को उनके बेटे की शादी है। बेटे की शादी पूर्व विधायक और सपा नेता महिपाल सिंह यादव की बेटी से हो रही है और शादी का आयोजन यहीं स्थित स्वर्ण लान में है। शुक्रवार शाम तक प्रशासनिक अमले में सीएम के आने की न तो हलचल थी न कोई कार्यक्रम आया था लेकिन शनिवार सुबह से नगर निगम और लोक निर्माण विभाग का अमला सेटेलाइट से सुरेश शर्मा नगर तक की सड़क चमकाने में लगा था। शनिवार शाम को जरूर एकबारगी तेजी से सीएम के आने की बात चली लेकिन रात तक सीएम आफिस और स्थानीय प्रशासन की तरफ से कोई कार्यक्रम जारी न होना बताया गया। हालांकि लखनऊ आफिस ने जरूर कहा कि निजी कार्यक्रमों में सीएम बिना प्रोटोकाल के भी जा सकते हैं। सीएम रविवार को दिल्ली जरूर जा रहे हैं और हो सकता है वह बरेली होते हुए जाएं।
इससे पहले भी नवंबर में सीएम के आने की चर्चा बहुत तेजी से उड़ी थी और उनके लिए स्वागत द्वार तक बनाए गए थे लेकिन अंत समय में उनके न आने की घोषणा हुई। हालांकि तब भी कार्यक्रम नहीं आया था। अक्तूबर में जरूर सीएम को आना था और बाकायदा कार्यक्रम भी आया था लेकिन शिक्षक स्नातक निर्वाचन चुनाव की आदर्श आचार संहिता के चलते उनका सरकारी दौरा रद्द हो गया था।
लेकिन यहां कोई कद्दावर नेता नहीं रहता.....
एक बानगी संजय नगर, दुर्गानगर, पुरानाशहर के इलाके भी हैं। यहां के बाशिंदे भी सोच रहे हैं कि काश कोई रसूखदार नेता यहां रहता और सीएम उसके यहां शादी में आते या आने की बात भी उड़ती तो ऊबड़-खाबड़ और जलभराव वाली सड़कों से निजात मिल जाती। जरा सी बारिश में भर जाने वाली सड़कें नहीं रहतीं। सर्फ से भले ही साफ नहीं होती लेकिन सफाई कर्मचारी कूड़ा तो उठा ही लेता। दिन में न सही रात में तो स्ट्रीट लाइट जलती। विकास के हाशिये पर पड़े शहर के ऐसे तमाम इलाकों के बाशिंदे एक ऐसी ही शादी का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें सीएम साहब आएं और उन्हें उपेक्षा और बदहाली से निजात मिल जाए।