ये नेता चुका रहे भारी भरकम कीमत
गनर का वेतन भले ही कम हो, लेकिन उसे किसी के साथ भेजने पर व्यव लगभग 1.37 लाख रुपये प्रति माह लगाया जाता है। सौ फीसदी व्यय पर गनर लेने वाले को यह रकम हर माह सरकारी खजाने में जमा करनी होती है। पचास फीसदी पर इसकी आधी रकम और दस फीसदी व्यय पर 13737 रुपये जमा करने होते हैं। क्यारा ब्लॉक प्रमुख के पति अरविंद चौहान गनर का सौ फीसदी व्यय जमा करते हैं। भाजपा नेता अनिल शर्मा, सुरेश गंगवार व ब्लॉक प्रमुख शेरगढ़ भूपेंद्र कुमार 50 फीसदी खर्च जमा करते हैं।
ऐसे होती है तैनाती
जिला स्तरीय समिति (डीएम-एसएसपी व सीओ एलआईयू) किसी आवेदन को उचित मानकर संबंधित को एक-एक महीने तक वानी अधिकतम तीन महीने के लिए सुरक्षाकर्मी दे सकती है। मंडल स्तरीय समिति (कमिश्नर-डीआईजी और एसपी इंटेलिजेंस) किसी को तीन-तीन महीने करके अधिकतम नौ माह तक सुरक्षा मुहैया करा सकती है। इससे आगे सुरक्षा जारी रखने का निर्णय शासन स्तर से लिया जाता है।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि किसी नेता या वीआईपी को कितना खतरा है, उसका आकलन करने के बाद ही गनर दिए जाते हैं। गनर व्यय का प्रतिशत भी सुरक्षा व जरूरत के आधार पर तय किया जाता है। हाल ही में कई गैर जरूरी गनर वापस बुलाए गए हैं। कई नए आवेदनों को निरस्त भी किया गया है।