बरेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभूतपूर्व फैसले की प्रतिक्रिया भी अभूतपूर्व रही। बाजार में अचानक सन्नाटा छा गया। दुकानदार न बड़े नोट लेने को राजी न छोटे नोट देने को। पेट्रोल पंप पर 1000 का नोट देकर 600 का तेल भरवाने वालों से परेशानज्यादातर ने पंप ही बंद कर दिए तो कुछ ने शर्त रखी कि तेल तो देंगे लेकिन पूरे नोट का चिल्लर नहीं मिलेगी। एपूरी स्थिति जानने के लिए लोगों की नजरें टेलीविजन पर लग गईं। दूसरी ओर बाजार में अफरा तफरी फैल गई। लोगों ने 500 और 1000 के नोट लेना बंद कर दिया। पेट्रोल पंप बंद हो गए, एटीएम पर लाइन लग गई लेकिन सरवर फेल होने के कारण यह भी जवाब दे गए।
शहर का प्रमुख सराफा बाजार समय से पहले बंद हो गया, अन्य प्रमुख बाजारों में लोगों ने सामान देना बंद कर दिया। दुकानदार परचितों को उधार में सामान देते रहे। जिनका कोई परचित नहीं था, वह मायूस होकर घरों को लौट आए। लोग जेबें टटोलकर पांच सौ और एक हजार के नोट गिनने लगे। घरों को फोन करके 500 और 1000 के नोटों की करेंसी का स्टाक जानना शुरू कर दिया। खर्चे के लिए लोगों ने सौ-सौ और पचास रुपये के उपलब्ध नोट गिनने शुरू कर दिए।
प्रभा सिनेमा के सामने एक कंपनी का पेट्रोल पंप खुला हुआ था। यहां पर पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट देने पर उतनी ही राशि का पेट्रोल दिया। अधिक राशि अदा करने पर खुले रुपये न होने के कारण कम राशि का तेल देने से इंकार कर दिया। इस पेट्रोल पंप पर देर रात भारी भीड़ देखी गई।
शाहमतगंज, कुतुबखाना, आलमगीरीगंज और बड़ा बाजार आदि में सामान खरीदने के दौरान व्यापारियों ने पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट लेने से साफ मना कर दिया। इसके बजाय परिचितों को उधार देने को सहमत नजर आए। शाम को बाजार में सन्नाटे जैसी स्थिति नजर आई, जो दुकानें देर रात तक खुलती थीं, वे शाम के बाद बंद कर दी गईं। में यही स्थिति देखी गई।
शहर के तमाम एटीएम पर एक हजार और पांच सौ रुपये के इतर सौ रुपये के नोट निकालने के लिए भीड़ जुट गई। कलेक्ट्रेट के सामने स्थित एसबीआई मुख्यालय पर लगे पैसा जमा करने वाले एटीएम पर काफी भीड़ लग गई। यह लोग एक हजार और पांच सौ के नोट जमा करने को जुटे लेकिन घंटे भर चलने के बाद ही एटीएम का सर्वर डाउन हो गया। इस बीच करेंसी को लेकर कई चर्चाओं के बीच लोग परेशान नजर आए।
सोशल साइट्स पर निकला 500 और 1000 का जनाजा
बरेली। प्रधानमंत्री मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने का फैसला क्या लिया सबसे ज्यादा भूचाल सोशल साइट्स पर आया। लोग एक दूसरे को फोन करने लगे जैसे लोग भूकंप की जानकारी लेने को फोन करते हैं ‘हैलो...क्या आपको झटका लगा।’ फेसबुक, ट्वीटर, वाट्सएप, एलो, हाइक और अन्य तमाम साइट्स पर सिर्फ मोदी का फैसला ही टॉप ट्रेंड रहा। इसने अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव को भी पीछे छोड़ दिया। स्मॉग, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारी भी कहीं छिप गए। सिर्फ 500 और 1000 की नोट पर ही बात होती रही।
यह जोक रहे टॉप ट्रेंड
गरीब कल की चिंता में थे, आज भ्रष्ट, लालची और अमीर कल की चिंता में हैं
लोग कहते हैं मोदी फेंकू है... ऐसा फेंका कि बटोरने का समय नहीं मिला
जैसे-तैसे लोग जियो की लाइन से निकले थे अब बैंक की लाइन में लग गए
500 और 1000 के अचानक निधन पर 100 का नोट बना परिवार का मुखिया
एक बात समझना, कभी किसी को छोटा मत समझना: 100 का नोट
एक 9/11 से अमेरिका हिल गया था, एक 9/11 से भारत हिल गया
लोग चिंतित हैं कि कहीं मोदी आधी रात को सोने को लोहा न घोषित कर दें
डॉक्टर साहब 4-5 लाख वाला कोई भी आपरेशन कर दो, रसीद दे देना
आसाराम बाबू...मुझे जेल से बाहर निकालो मुझे भी नोट बदलने हैं
मोदी जी वो प्रोफेसर हैं जो एक घंटा पहले बताते हैं कि सिलेबस चेंज हो गया
आधी रात बात बाद लाइट जल रही है तो समझ लो इस घर में नोट गिने जा रहे हैं।
जिनकी कल परसों शादी है उनके लिए एक मिनट का मौन। खाली लिफाफे मिलेंगे।
सुबह मोदी ने फ्रिज खोला। दूध की जगह थम्स अप निकली । बोले चलो कुछ तूफानी करते हैं।
मेरे सभी एकाउंट में जीरो बैलेंस है संकट के समय काम आ सकता हूं,संपर्क कर लें।
इसीलिए बोला था चाय वाले को पीएम न बनाओ। 5 10 को नोट को अलावा कुछ समझ में नहीं आया।
अस्पतालों में भीड़। डॉक्टर साब किसी चीज का आपरेशन कर लो 4-5 लाख वाला।
मोदी ने अस्पताल को छूट दे दी। पता था कई लोगों को अस्पताल जाना पड़ेगा।
और उंगली करो काला धन कब आएगा कब आएगा। अब अंदर ही अंदर सड़ जाएगा।
मोदी ऐसा अकेला चाय वाला जिसने बिना चाय पिलाए 120 करोड़ की नींद खोल दी।
कहा था सबके बैंक में 15 लाख आएंगे किसी ने सोचा न था कि लोग खुद ही जमा कराएंगे।
100 के नोट की बढ़ी अहमियत
बरेली। 100 व 50 के नोटों का लेनदेन कारोबारी और नौकर पेशा लेने से परहेज करते थे। रिश्वत खोर तो इससे दूर भागते थे। यहां तक कि बैंक भी इस करेंसी को जमा करने में आना कानी करती थीं। अचानक बड़े नोट बंद होने से 100 का नोट सबसे बड़ा हो गया और रातों रात अहमियत बढ़ गई। जिले भर में आम तौर पर हर दिन करीब सवा सौ करोड़ कैश का बैंकों में आदान प्रदान होता है। इनमें ज्यादा तर बड़े नोट ही इस्तेमाल होते हैं। एटीएम से करेंसी निकालने वाले लोग अधिकतर बड़े नोटों का आप्शन देते हैं। अचानक बदली परिस्थितियों में यह स्थिति हो गई है कि बैंकों में छोटे नोटों का स्टाक सीमित हो गया है। एक दिन बैंकों में लेनदेन करेंसी की गणना के लिए काम काज बंद किया गया है। एसबीआई के उप महा प्रबंधक सुनील कुमार वढ़ेरा ने बताया कि कुछ दिनों करेंसी लेन में समस्या जरूर आएगी लेकिन ग्राहक धैर्य रखें और सहयोग करें।