बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश (न्यायालय संख्या-तीन) विजेंद्र त्रिपाठी ने पत्नी को जिंदा जलाकर मारने के मामले में दोषी पाए जाने पर सिरौली थाना क्षेत्र के गांव लीलौर निवासी मुकेश को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि अदा न करने पर दोषी को एक वर्ष अतिरिक्त जेल में रहना होगा।
थाना व कस्बा सिरौली निवासी बेबी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपनी बेटी मोनी की शादी थाना क्षेत्र के गांव लीलौर निवासी मुकेश के साथ की थी। 25 मई 2018 को उनको पता लगा कि पति मुकेश, जेठानी मंजू और ननद नीलम ने मोनी को जिंदा जला दिया है।
वह मोनी की ससुराल पहुंचीं तो उसके कमरे में आग लगी हुई थी। बिस्तर आदि सब कुछ जला हुआ था। गांव के लोगों की सूचना पर पुलिस आई। मोनी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी। इलाज के दौरान 10 जून 2018 को मोनी की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने मामला हत्या की धाराओं में तरमीम कर लिया।
विवेचना के दौरान मोनी की ननद और जेठानी के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिले। पुलिस ने पति मुकेश के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। मुकेश के खिलाफ हत्या की धारा में आरोप तय किया गया।
अभियोजन ने आठ गवाह और 14 साक्ष्य पेश किए। बचाव पक्ष ने बच्चों के झगड़े में खुद को आग लगाने की दलील दी, लेकिन वह साबित नहीं कर सका। मोनी ने मौत से पहले अस्पताल में मजिस्ट्रेट को बयान दिया था कि पति ने उसे कमरे में बंद कर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगाई थी।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने मुकेश को हत्या का दोषी करार देते हुए कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। संवाद