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Bareilly News: गैर इरादतन हत्या के दोषी को साढ़े नौ साल कैद की सजा

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लखीमपुर खीरी। 10 वर्ष पुराने गैर इरादतन हत्या के मामले में एडीजे दिनेश गौतम की अदालत ने दोषी रिंकू उर्फ रुकम सिंह को साढ़े नौ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 5,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, बरेली के बहेड़ी थाना क्षेत्र निवासी सलमान ट्रक चालक था। उसके साथ किच्छा (ऊधमसिंह नगर) निवासी रिंकू उर्फ रुकम सिंह क्लीनर के रूप में काम करता था। पांच जुलाई 2016 को दोनों किच्छा से लोहे की सरिया लेकर मैगलगंज आए थे। छह जुलाई को सरिया उतारने के बाद औरंगाबाद होकर लौटते समय किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि गुस्से में रिंकू ने व्हील पाना से सलमान के सिर पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने सलमान को मृत घोषित कर दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान इस्लाम, मजीद, दलवीर सिंह, पुष्पेंद्र यादव, इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश और डॉक्टर सुरेश के बयान दर्ज किए गए। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने रिंकू उर्फ रुकम सिंह को दोषी ठहराते हुए साढ़े नौ साल के कठोर कारावास और 5,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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जाली नोटों का धंधा करने में दोषी को पांच साल की कैद



बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश स्पेशल जज गैंगस्टर एक्ट संतोष कुमार यादव ने जाली नोटों का धंधा करने के मामले में बदायूं के थाना हजरतपुर के गांव बक्सेना निवासी कादिर को शनिवार को पांच साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसी मामले में एक बाल अपचारी का मामला किशोर न्याय बोर्ड के सुपुर्द कर दिया गया।

आंवला थाना पुलिस ने एक किशोर को नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ में सामने आया कि उसको जाली नोट कादिर ने दिए थे। यह लोग जाली नोट गांव-देहात की छोटी दुकानों पर चलाते थे। कादिर दिल्ली में सिलाई का काम करता था। उसकी गिरफ्तारी को बदायूं और दिल्ली के थाना खजूरी खास के सी ब्लॉक नंबर नौ फव्वारा वाला मंदिर स्थित उसके अस्थायी पते पर भी दबिश दी गई, लेकिन वह हाथ नहीं आया। अब्दुल कादिर को पुलिस ने कादिर को दो जुलाई 2023 को आंवला में वजीरगंज बस अड्डे के पास से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 100-100 रुपये के 28 नोट मिले।
जांच के बाद पुलिस ने छह अगस्त 2023 को कादिर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। मध्य प्रदेश की विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट और कादिर व बाल अपचारी से बरामद जाली नोट अभियोजन ने कोर्ट में पेश किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कादिर को दोषी करार देते हुए कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है।
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विचाराधीन मामले में दीवार गिराने पर लेखपाल और इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच का आदेश



बरेली। एक विचाराधीन मामले में दीवार गिराने के आरोप में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम दीपक कुमार मिश्र ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिथरी चैनपुर पुलिस की ओर से अन्वेषण रिपोर्ट न भेजने पर जिलाधिकारी और एसएसपी से रिपोर्ट तलब की है। यह मामला विपक्षी से सांठगांठ कर अवैध निकास निकलवाने से जुड़ा है, जिसकी अगली सुनवाई 20 जून को होगी।







बिथरी चैनपुर डोहरिया निवासी कुलदीप पटेल के अधिवक्ता हर्ष कुमार अग्रवाल ने बताया कि उनके मुवक्किल के मकान के सामने विपक्षी की कई दशक पुरानी दीवार थी। सभी के दरवाजे दूसरी तरफ थे, लेकिन कुलदीप की तरफ निकास को लेकर विवाद शुरू हुआ। यह मामला सिविल कोर्ट में विचाराधीन था। इसके बावजूद 11 मार्च 2023 को विपक्षी ने दीवार तोड़ना शुरू कर दिया। इसकी सूचना थानाध्यक्ष और एसडीएम को दी गई थी। 22 मार्च 2023 को तत्कालीन लेखपाल विशाल मोहन ने सिपाही और होमगार्ड के साथ मिलकर अवैध निकास निकलवाना शुरू किया। विरोध करने पर लेखपाल और अन्य भड़क उठे। एसडीएम ने लेखपाल को वापस लौटने का निर्देश दिया था, लेकिन एसडीएम के आदेश की अवहेलना करते हुए 25 मार्च 2023 को दीवार गिरा दी गई।







पुलिस और लेखपाल पर मिलीभगत का आरोप







तत्कालीन सीडीओ ने थानाध्यक्ष बिथरी चैनपुर अश्वनी कुमार को फोन कर विपक्षी पर कार्रवाई का आदेश दिया था। हालांकि, थानाध्यक्ष ने कुलदीप को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर थाने से भगा दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि लंबे समय से जांच रिपोर्ट न भेजने से लगता है कि प्रभारी निरीक्षक जानबूझकर आख्या पेश नहीं कर रहे हैं। यह आरोप है कि लेखपाल और पुलिस ने विपक्षीगण से सांठगांठ कर दीवार गिराई।
अधिकारियों से मांगी गई रिपोर्ट

अदालत ने पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच के लिए एसएसपी से रिपोर्ट तलब की है। वहीं, लेखपाल की भूमिका की जांच के लिए डीएम से रिपोर्ट मांगी गई है। बीएनएसएस के तहत आरोपित लोक सेवक के वरिष्ठ अधिकारी की आख्या आवश्यक होती है।
कोर्ट में कमजोर पड़ा अभियोजन पक्ष, कॉपीराइट एक्ट का आरोपी दोषमुक्त
बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट राघवेंद्र मणि ने कॉपीराइट, जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोपी बारादरी थाना क्षेत्र की श्रीरामनगर कॉलोनी निवासी अनिल शर्मा को शुक्रवार को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया है। मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य, स्वतंत्र गवाह पेश नहीं कर सका। गवाहों के बयानों में भी भिन्नता रही।
बारादरी थाने के तत्कालीन एसआई चमन गिरि ने 25 सितंबर 2021 को दिनेश पंडित, नितिन गुप्ता, सचिन गुप्ता और अनिल शर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया था कि एक सूचना के आधार पर अनिल शर्मा के घर पर छापा मारा गया तो यहां नकली गगन गुटखा तैयार किया जा रहा था। मौके से 50 किलो नकली गुटखा, 30 किलो तंबाकू, मिक्सचर मशीन आदि बरामद किया गया। जांच के बाद पुलिस ने अनिल शर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने सात गवाह पेश किए, लेकिन कोई स्वतंत्र गवाह पेश करने में नाकाम रहा।
बचाव पक्ष की ओर से की गई प्रतिपरीक्षा में गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाया गया। इसके अलावा गिरफ्तारी और बरामदगी के संबंध में पुलिस रवानगी जीडी दाखिल नहीं कर सकी। बरामद गुटखा का सैंपल भी 17 दिन देरी से विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। मिक्सचर मशीन भी कोर्ट में पेश नहीं की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अनिल शर्मा को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।

कातिलाना हमले में तीन सगे भाइयों समेत चार आरोपी दोषमुक्त



बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश विजेंद्र त्रिपाठी ने पिता-पुत्र पर जानलेवा हमले के आरोपी मीरगंज थाना क्षेत्र के गांव जाम निवासी अतर सिंह, प्रताप सिंह, मुनीश कुमार (सगे भाई) और कल्लू को शुक्रवार को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया। इस मामले में वादी और गवाह प्रति परीक्षा के दौरान बयानों से मुकर गए।



मीरगंज थाने के गांव जाम निवासी कुंवरसेन ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि एक जनवरी 2016 को वह और उसका बेटा महीपाल रात नौ बजे अमर सिंह के घर से अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में धर्मपाल, कल्लू, प्रताप, संजीज उर्फ राजीव, अनिल, मुनीश, अतर सिंह ने उन पर लाइसेंसी बंदूक और तमंचों से फायरिंग कर दी। गोली लगने से वह और उसका बेटा घायल हो गया। जांच में धर्मपाल, अनिल, संजीज उर्फ राजीव की नामजदगी झूठी पाई गई। पुलिस ने कल्लू, अतर सिंह, प्रताप सिंह व मुनीश के खिलाफ जानलेवा हमले की धाराओं में चार्जशीट दाखिल कर दी।



सुनवाई के दौरान अभियोजन ने सात गवाह पेश किए। प्रतिपरीक्षा के दौरान कुंवरसेन और उसका बेटा महीपाल बयान से मुकर गए। उन्होंने कहा कि रात के अंधेरे में किसी अज्ञात व्यक्ति ने गोली चलाई वह उसे पहचान नहीं सके। दो अन्य गवाहों ने भी आरोपियों को देखने की बात से इन्कार कर दिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।
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