पिछले 30 सालों में शहर के मेयर की कुर्सी पर कई नेता बैठे, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण समस्याएं अब भी वैसी ही हैं, जैसी 30 साल पहले थीं। एक के बाद एक चुनाव में यह समस्याएं मुद्दा जरूर बनती रहीं, मेयर पद के प्रत्याशियों ने इन्हीं मुद्दों पर एक-दूसरे को खूब कोसा लेकिन खुद मेयर बने तो भूल गए कि उन्होंने भी जनता से कोई वादा किया था। निकाय चुनाव का बिगुल बजने के बाद अब फिर आपके सामने फिर कई चेहरे हैं। किसको मेयर बनाएंगे, यह फैसला आपको ही करना है, लेकिन इतना जरूर समझ लें कि किसी को मेयर किसी को बना दें, यह उम्मीद मत रखिएगा कि वह आपकी समस्याओं का समाधान करा देगा। अमर उजाला बरसों पुरानी कुछ ऐसी समस्याओं से आपको रूबरू करा रहा है जो इस बार प्रत्याशी के एजेंडे तक में नहीं हैं।
मुद्दा-1
सुभाषनगर पुलिया
सुभाषनगर में पुलिया की वजह से जलभराव होने की समस्या काफी पुरानी है। सिर्फ दो फुट चौड़े नाले से गंदे पानी के ओवरफ्लो होने से सुभाषनगर जाने वाला पूरा रास्ता बंद हो जाता था। वर्ष 2004 में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की निधि से दो बार 11 और 15 लाख रुपये दिए गए, जिसके बाद नगर निगम ने नाले को आठ फिट चौड़ा किया, लेकिन चूंकि पूरे शहर का पानी इसी नाले में आता है, लिहाजा नाला फिर भी पहले की तरह ओवरफ्लो कर रहा है। शहर से काफी नीचे स्तर पर बसे सुभाषनगर के लिए यह नाला बहुत बड़ी समस्या है। रेलवे यहां ओवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव खारिज कर चुका है। नाले का मार्ग मोड़ने का प्रस्ताव बना था जो नगर निगम में लंबित पड़ा है।
मुद्दा-2
जिला अस्पताल के सामने अतिक्रमण
बरेली में पिछले कई सालाें से मुख्य सड़कों को दुकानदारों ने घेरकर कब्जा कर रखा है। अवैध कब्जों को हटाने की तमाम बार कवायद हुई, अभियान भी चलाए गए, लेकिन ये सड़कें कभी भी अतिक्रमणमुक्त नहीं हो सकीं। जिला अस्पताल के सामने से गुजरने वाली सड़क से जिन दुकानदारों को हटाकर इंद्रा मार्केट बना दिया गया था, उनके हटने के बाद फिर यहां कब्जा हो गया। पुलिस और नगर निगम की मिलीभगत से हुए इस अतिक्रमण पर किसी का जोर नहीं चलता। कई बार जाम में फंसकर एंबुलेंस के मरीज भी दम तोड़ चुके हैं। हाल ही में डीजीपी ने आदेश दिया था कि जिला अस्पताल जाने वाली सड़कों को हर हाल में अतिक्रमणमुक्त कराया जाए, लेकिन उनके मातहतों ने ही उनके आदेश पर ध्यान नहीं दिया।
मुद्दा-3
अवैध डेयरियां
शहर के बीच छह सौ से अधिक अवैध डेयरी चिन्हित की गई हैं। इन डेयरियों में पलने वाले जानवर सड़कों पर गंदगी फैलाते चलते हैं। डेयरियों से बहाए जाने वाले गोबर से न सिर्फ तमाम नाले चोक हो चुके हैं बल्कि सीवर लाइन भी बंद हो जाती है। नगर निगम प्रशासन ने पिछले दिनों एक बायलॉज बनाकर इन अवैध डेयरियों पर कड़ी कार्रवाई का मन बनाया था, लेकिन इस पर शासन की अनुमति चाहिए जो कोई नेता नहीं दिला सका। शहर में आवारा घूम रहे पशुआें को एक जगह बंद करने के लिए कान्हा उपवन की जमीन खडू़आ में चिह्नित की जा चुकी है, लेकिन अभी काम शुरू नहीं हुआ है। कई डेयरियां तो पॉश इलाकों में तक चल रही हैं, लेकिन उस पर भी सभी चुप हैं।
मुद्दा-4
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट
रजऊ परसपुर में बने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट चलाने के लिए कोई ठोस प्रयास ही नहीं हुआ जबकि इस प्लांट की स्थापना पर वर्ष 2013 में करीब 13.84 करोड़ रुपये खर्च हुआ था। अब काफी समय से बंद पड़े प्लांट की मशीनें धीरे-धीरे जंग खाने लगी हैं। प्लांट चलाने से पहले पीसीबी के निर्धारित मानक का पालन नहीं किया गया, इसलिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्लांट चलाने पर रोक लगा दी। 1936 में निगम को रजऊ परसपुर पर सॉलिड वेस्ट के लिए जमीन मिली थी। निगम 1989 तक वहां कूड़ा डालता रहा लेकिन इसके बाद यह स्थान बदलकर बाकरगंज पर आ गया। यह मुद्दा वायुसेना के विमानों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। फिर भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया।
मुद्दा-5
सीवर लाइन
शहर के चालीस फीसदी इलाके में लगभग 214 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन है। यह सीवर लाइन 50 साल पहले बिछाई गई थी, जो अब पुरानी होने की वजह से अक्सर जगह-जगह धंस जाती है। केंद्र सरकार ने अमृत योजना के तहत सीवर लाइन बदलने और नई लाइन डालने के लिए करीब दो हजार करोड़ रुपये का बजट दिया है, लेकिन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन नहीं मिली है। नया प्लांट बनाने के लिए ढाई एकड़ जमीन चाहिए। सिर्फ 1400 करोड़ रुपये का काम सीवरेज प्रबंधन का होगा। इसमें 1200 कि लोमीटर की सीवर लाइन डाली जानी है। कालीबाड़ी से कटरा चांद खां और सराय तल्फी तक करीब 56 करोड़ में लाइन बिछाने के लिए मिल गए हैं।
मुद्दा -6
शहर के अवैध बाजार
शहर में शाहजहांपुर रोड पर मधुबन टाकीज के आसपास अवैध रूप से संडे बाजार लगता है। इसके अलावा बृहस्पतिवार को अयूब खां चौराहे से हनुमान मंदिर तक और सराय खाम से लेकर किला रोड तक सड़क पर अवैध रूप से लगने वाला बाजार बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन किसी मेयर ने अपने कार्यकाल में इस पर ध्यान नहीं दिया। दिखावे के लिए कुछ दिन अभियान चलाए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। पुलिस की शह मिलने पर यह अवैध बाजार करीब 20 साल से लगातार लग रहे हैं, लेकिन किसी को इसकी सुध नहीं है।
मुद्दा-7
बदहाल पार्क
शहर के ज्यादातर पार्कों के बुरा हाल है। गांधी उद्यान को छोड़ दिया जाए तो शहर के किसी पार्क को नगर निगम ने इस लायक नहीं बनाया कि वहां घूमने के लिए जाया जा सके। सीआई पार्क का हाल दिन ब दिन बिगड़ता जा रहा है। सिविल लाइंस का पंत पार्क, राम मनोहर लोहिया पार्क, आवास विकास पार्कों, डीडीपुरम के पार्क की हालत बुरी है, लेकिन किसी ने इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। पार्कों की हालत में सुधार कराने के बारे में आगे भी नगर निगम के पास कोई प्लान नहीं है।
मुद्दा-8
तालाबों पर कब्जा
नगर निगम के अधिकारियों और नेताओं की लापरवाही की वजह से शहर के तालाबों पर कब्जा हो रहा है। डेलापीर तालाब पर कब्जे का मामला अदालत तक पहुंच गया है, लेकिन निगम को अभी तक कोई लाभ अभी तक नहीं हुआ है। यही हाल सिविल लाइन के अक्षर विहार का तालाब का है। तालाब के आसपास के इलाकों को कुछ लोगों ने कब्जा करना शुरू कर दिया है। संजय कम्युनिटी हाल के पास के तालाब का सुंदरीकरण अभी तक नहीं हो पाया है।
मुद्दा-नौ
शौचालयों का निर्माण
शहर के बाजारों मेें शौचालय ने होने से दुकानदार और ग्राहक दोनों ही बीमार हो रहे हैं। दुकानों पर काम करने वाली 500 से अधिक महिला कर्मचारियों को शौचालय न होने पर काफी परेशानी उठानी पड़ती है। बाजार आने वाली महिलाएं भी शौचालय न होने से ऐसी ही दिक्कतें झेलती है। व्यापारी प्रमुख बाजारों में अपने पैसे से शौचालय बनवाने को भी तैयार हैं, लेकिन नगर निगम ने उनके इस प्रस्ताव पर अभी तक ध्यान ही नहीं दिया है। व्यापारियों की तरह अगर नगर निगम के जनप्रतिनिधि और अधिकारी लोगों की इस समस्या पर जरा भी ध्यान देते तो इस समस्या का समाधान हो चुका होता।