फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संभावनाएं अपार, हमारी भी सुनो ‘सरकार’

Thu, 26 Feb 2015 12:18 AM IST
बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
अगर ‘सरकारें’ बरेली के बाशिंदों से लेकर उद्यमियों के सुझावों पर थोड़ा भी गौर फरमा लें, ‘मेक इन इंडिया’ में एक अहम भूमिका ‘मेक इन बरेली’ की भी होगी। कृषि क्षेत्र में गेहूं, चावल, सब्जियों का प्रचुर उत्पादन, नान लेदर और स्पोर्ट्स फुटवियर में शू अपर का बेहतर काम, विदेशों में धाक जमाने वाली महीन जरी जरदोजी, उत्तर से लेकर दक्षिण और पूरब से लेकर पश्चिम तक के ड्राइंग रूमों में बांस और बेंत के सहारे बरेली की पैठ, यानी मेक इन बरेली के लिए ढेर सारी संभावनाएं हैं लेकिन सरकारों की नजर-ए-करम नहीं रहीं। अब मेक इन इंडिया के सहारे रोजगार और स्मार्ट सिटी के जरिए बेहतर विकास की मोदी की घोषणा के बाद बरेली के बाशिंदों को आम बजट का बेसब्री से इंतजार है। वह बेहतरी की आशा भी कर रहे हैं।
विज्ञापन


देश के लिए समग्र विकास का बजट चाहिए। बरेली में भी अवसरों की भरमार है इसलिए भागीदारी मिलनी चाहिए। हम यह भी देखेंगे कि स्मार्ट सिटी और मेक इन इंडिया में बरेली को क्या मिल रहा है। इससे हमें नई चुनौती, नए अवसर मिलेंगे। बरेली को विभिन्न उद्योगों के छोटे क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा सकता है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट, डिफेंस सप्लाई, जरी बेस्ड शू अपर और टेक्सटाइल क्लस्टर की संभावनाएं हैं। रेडी टू ईट फूड की डिमांड बढ़ रही है। ऐसे में एग्रो बेस इंडस्ट्री के लिए विशेष प्रावधान हो सकता है।
दिनेश गोयल
अध्यक्ष, सेंट्रल यूपी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री

उद्योगों को वित्तीय मदद की जरूरत है। सरकार सारे टैक्स लें लेकिन उद्योग लगाने के लिए पांच या दस साल के लिए बिना ब्याज पर कुछ ऋण भी दे। इससे उद्योग और रोजगार बढ़ेगा। वहीं इंडस्ट्री रजिस्ट्रेशन में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करनी होगी। कई विभाग भूखे भेड़िये की तरह उद्यमियों पर टूट पड़ते हैं और 95 फीसदी प्रपोजल दम तोड़ देते हैं। कारोबार पर टैक्स अधिक है तो सुविधा भी अधिक दें। स्किल डेवलपमेंट के लिए वर्कशाप चाहिए। सभी टैक्स अदा करने वाले उद्यमियों को टैक्स के सापेक्ष मदद का भी प्रावधान हो। ट्रेडर्स के लिए आडिट सीमा एक से बढ़ाकर पांच करोड़, बचत खाते की ट्रांजिक्शन सीमा सालाना 35 लाख से बढ़ाकर दो करोड़ और कैश ट्रांजिक्शन बीस हजार प्रतिदिन से बढ़ाकर एक लाख किया जाए।
विज्ञापन

राजेंद्र गुप्ता
महानगर अध्यक्ष उप्र उद्योग व्यापार मंडल

आम बजट में लघु एवं मध्यम उद्यमियों के लिए आयकर की सीमा बढ़ाई जाए और अधिकतम टैक्स का स्लैब बीस फीसदी किया जाए। इससे उद्योगों को राहत मिलेगी। गुड्स एंड सर्विस टैक्स की घोषणा की जाए। भले ही इसे 2016 से लागू करने की बात हो लेकिन इसी बजट में घोषणा कर देनी चाहिए। जीएसटी से हर प्रदेश में वस्तुओं पर टैक्स दर एक होगी। सरकार कराधान कम करे, उद्योगों का पंजीयन कराने में दौड़ाए नहीं। इससे उद्यमी राहत की सांस लेंगे।
मनोहर लाल धीरवानी
अध्यक्ष आईआईए

बजट में गुजरात की छाप दिख सकती है। सोलर एनर्जी, नहरों का विकास, कृषि उपज बढ़ाने पर जोर होगा। आशा है सरकार का जोर सब्सिडी पर नहीं बल्कि लोगों में रोजगार की ललक पैदा करने पर होगा। उत्पादकता बढ़ाने पर प्रयास होगा। जीडीपी बढ़ाने के लिए एग्रो बेस इंडस्ट्री, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, नई सड़क, नई इंडस्ट्री पर फोकस होगा। एक्साइज ड्यूटी कम होगी। आयकर स्लैब में बदलाव होगा। विकास परक योजनाएं मिलने की उम्मीद है। जीएसटी का प्रारूप भी रखा जा सकता है। इससे करों की विषमताएं खत्म होंगी और विदेशी निवेश बढ़ेगा। टैक्स चोरी कठिन हो जाएगी और काबिल ही आगे बढ़ेंगे।
घनश्याम खंडेलवाल
मंडल अध्यक्ष, आईआईए

बरेली शहर में राज्य और केंद्र की नीतियां औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहन देने के लिए हैं, उनका सही क्रियान्वयन जरूरी है। सब्सिडी देने की भी जरूरत है। टेक्सटाइल मिनिस्टर भी बरेली के हैं इसलिए बरेली को टेक्सटाइल क्लस्टर के पैकेज में शामिल किए जाने की संभावना है। यहां नए उद्योगों को आमंत्रित करना होगा। जब तक कोई बड़ा उद्योग नहीं लगेगा औद्योगिकीकरण को गति नहीं मिलेगी। सरकार को इस जोन में संभावनाएं देखते हुए नीतियां, योजना, विशेष पैकेज देना होगा। अर्थव्यवस्था बढ़ेगी। मेक इन इंडिया पर विशेष नजर रहेगी।
विज्ञापन

आदित्य मूर्ति
अध्यक्ष, सेंट्रल यूपी चैंबर इंडस्ट्री एंड सोसाइटी बरेली चैप्टर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें