बरेली। बेटियों को इतना सक्षम बनाना चाहिए कि दूर शहर हो चाहें आधी रात वे अकेले आने-जाने से न करताएं। अमर उजाला परिसर में नवरात्र के अवसर पर शनिवार को आयोजित महिला सशक्तीकरण संवाद कार्यक्रम में शहर की महिलाओं ने ये बातें कहीं।
कार्यक्रम में आईं महिला संगठन की सदस्य, बाल विकास परियोजना अधिकारी, महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पहुंची। उन्होंने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर बल दिया। महिलाओं ने कहा, जितनी आजादी हम अपने बेटों को देते हैं, उतना भरोसा और छूट अपनी बेटियों को भी देना जरूरी है। उनको ऐसा महसूस नहीं कराना चाहिए कि उनकी सुरक्षा हम पर बोझ है या बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। बल्कि उनको सक्षम बनाना चाहिए, जिससे वे स्वयं अपने कार्य सार्थक कर सकें। कहीं आने-जाने या कुछ नया करने से कराएं नहीं।
पति का मिला साथ
महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों ने कहा कि आर्थिक आजादी की जंग अकेले नहीं जीती जाती है। इसमें पति का सहयोग रहा। सहयोग से वे छोटे-छोटे काम सीखकर रोजगार पा रही हैं न केवल स्वयं सशक्त हो रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी समूह के साथ जोड़कर सशक्त होने के प्रेरित कर रही हैं।
अधिकारी बनीं तो ग्रामीणों ने अन्य को किया प्रोत्साहित महिला बाल विकास अधिकारियों ने अपने कॅरिअर के किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि वे ग्रामीण पृष्ठभूमि से होने साथ ही अपने परिवार की पहली महिला अधिकारी हैं। उनके पढ़ने-लिखने के बाद गांवों की सोच में परिवर्तन आया। मायके में ही नहीं ससुराल पक्ष में भी लोग अपनी बहुओं को भी नौकरी करने और पर्दे से बाहर निकलने के लिए प्रोत्साहित करने लगे।
इनकी रही मौजूदगी -
कार्यक्रम में राजकुमारी, विजय लक्ष्मी, विमला कुमारी, श्रुति त्रिवेदी, सुशीला देवी, सुनीता रस्तोगी, मधु यादव, सरला देवी, भावना कुमारी, रीना पटेल, संतोष, राधा मल्होत्रा, मनीषा आहूजा, रंजीता नागपाल, अर्चना और भावना कुमारी मौजूद रहीं।