बरेली। सदर बाजार कैंट के सांस्कृतिक मंच पर शनिवार को लंका दहन, विभीषण शरणागत और अंगद-रावण संवाद की लीलाओं का मंचन किया गया। लीला के विभिन्न प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस दौरान भगवान श्रीराम की भक्ति, धर्म की विजय और अधर्म के विनाश का संदेश दिया गया।
श्री रामलीला नाटक समाज की ओर से किए जा रहे मंचन में दिखाया गया कि हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे। अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट करने से लेकर लंका दहन तक की लीला का मंचन किया गया। लंका दहन के दृश्य को देखकर दर्शकों ने श्रीराम के जयकारे लगाए। गोस्वामी जी ने इस प्रसंग का वर्णन करते हुए लिखा है-
ताकर दूत अनल जेहिं सिरिजा। जरा न सो तेहि कारन गिरिजा।
उलटि पलटि लंका सब जारी। कूदि परा पुनि सिंधु मझारी॥
अर्थात (शिवजी कहते हैं-) हे पार्वती, जिन्होंने अग्नि को बनाया, हनुमानजी उन्हीं के दूत हैं। इसी कारण वे अग्नि से नहीं जले। हनुमानजी ने उलट-पलटकर सारी लंका जला दी। फिर वे समुद्र में कूद पड़े।
इसके बाद विभीषण के श्रीराम की शरण में आने के प्रसंग का मंचन किया गया। अंगद-रावण संवाद का मंचन देख दर्शक रोमांचित हुए। इस दौरान अध्यक्ष सतीश मेहता, सचिव सुनील कुमार सिंह, शितेश अग्रवाल सहित कमेटी के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। रविवार को लक्ष्मण शक्ति लीला का मंचन किया जाएगा।