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जादुई सिस्के के नाम पर 70 हजार लूटे

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निघासन। नागमणि, मोरपंखी, सोने की ईंट, जादुई चस्मा, जादुई गिलास के नाम पर अब ‘जादुई सिक्का’ के नाम पर चार लोगों से 75 हजार रुपये ठग लिए गए। रकेहटी चौराहे पर मंगलवार रात लेन-देन के वक्त पुलिस पहुंच गई तो ठग रुपयों से भरा थैला लेकर भाग निकले, जबकि खरीदने आए चार लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना है कि इन लोगों से पूरे नेटवर्क के बारे में मालूम किया जा रहा है कि वे इन सिक्कों को किसे और कहां बेचते। इस ‘जादुई सिक्के’ को लेकर इलाके के कुछ लोगों में अंधविश्वास है कि यह जिसके पास होता है उसके पास अपार धन दौलत खुद चलकर आती है। ठगों ने इसी का लाभ उठाते हुए नेपाल और बलरामपुर के चारों लोगों को अपना निशाना बनाया था। पुलिस का कहना है कि ठगों की पहचान कर ली गई है, जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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मंगलवार की रात करीब नौ बजे रकेहटी चौराहे पर शाहजहांपुर के नंबर की एक स्कार्पियो गाड़ी खड़ी थी। यह घंटे भर से ज्यादा स्टार्ट खड़ी रही। गाड़ी के के अंदर कई लोग बैठे थे। इसी बीच दो युवक बाइक से आए और स्कार्पियो में सवार लोगों से रुपयों से भरा थैला मांगने लगे। गाड़ी के अंदर से एक व्यक्ति ने रुपयों का थैला दिखाने के लिए खिड़की से बाहर निकाला। बाइक सवार दो में से एक युवक ने वह थैला हाथ में ले लिया और पैंट की जेब से सिक्का निकालने का नाटक करने लगा। तब तक वहां पुलिस भी आ गई। पुलिस की गाड़ी देखते ही बाइक सवार दोनों युवक तुरंत भाग गए। पुलिस ने स्कार्पियो के अंदर बैठे चारों संदिग्धों को तुरंत पकड़ लिया और स्कार्पियो समेत उन्हें थाने लाया गया। पुलिस की पूछताछ में चारों ने बताया कि वह बाइक सवार दोनों युवकों से जादुई सिक्का खरीदने आए थे। स्कार्पियो सवार खरीददारों ने अपना पता जनपद बलरामपुर निवासी सुभाष, इस्तियाक, सुहेल, कादिर निवासी जिला कपिल वस्तु नेपाल बताया। चारों ने पुलिस को बताया कि उन बाइक सवार लोगों से फोन पर वार्ता हुई थी। उसके आधार पर ही वह इनसे जादुई सिक्का खरीदने आए थे। सुभाष ने बताया कि फोन पर कांटेक्ट होने के बाद छोटू नामक व्यक्ति ने फोन कर स्थान और समय तय किया था। नेपाल निवासी इस्तियाक ने बताया कि उनके पूर्वज बलरामपुर के थे। इसलिए उसकी ‘जादुई सिक्का’ बेचने वाले से दोस्ती पहले से है। बाद में वह परिवार समेत नेपाल में जाकर बस गया था।

ऐसे बनाते हैं ‘जादुई सिक्का’
सिक्के को कथित तौर पर जादुई बनाने के लिए पहले चावलों को पानी में भिगोया जाता है। जब वह फूल जाते हैं तो लोहे का बुरादा डाला जाता है, जो चावलों में चिपक जाता है। चावलों को काला करने के लिए पहले उनको एक डिब्बे में बंद करते हैं। फिर बीड़ी या सिगरेट पीकर उसको धुआं सहित उसमें थूक देते हैं। फिर तेजाब की कुछ बूंदे उसमें डाल देते हैं। तब जादुई सिक्का बनकर तैयार हो जाता है। जब भी कोई ऐसा जादुई सिक्का खरीदने आता है तो खरीद-बिक्री के लिए अंधेरा कमरा चुनते हैं। उस कमरे में पतली मेज के ऊपर चावल बिखेर देते हैं। फिर नीचे एक लोहे की कील के सहारे चुंबक चिपका देते हैं। सिक्का रखते ही एक व्यक्ति सफाई से चुंबक को चावलों की ओर कर देता है, जिससे वह चावल सिक्के की ओर बढ़ जाते हैं। ठग जादू दिखाने के लिए चावल को हाथ में लेते हैं जिससे वह बुरादा बन जाता है।
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इन गांवों में होती है ठगी
क्षेत्र के गांव मिर्जागंज, सोठियाना, रायपुर के गांवों में लोगों से ठगी की जाती है। इन लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए अपना नेटवर्क दिल्ली, कोलकता, हरियाणा, राजस्थान, मुंबई समेत कई महानगरों में फैला रखा है। साथ ही बाहर काम करने वाले लोग भी इनके नेटवर्क का हिस्सा होते हैं।
स्कार्पियों में चार संदिग्ध जादुई सिक्का खरीदने आए थे। उनको हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। मामला जादुई सिक्के के नाम पर ठगी का है। ठगों को पुलिस ने चिह्नित कर लिया है। उनको शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा। -दीपक शुक्ला, प्रभारी निरीक्षक
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