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योगी राज में मां ऊषा देवी... बेटा अब्दुल्लाह

Sun, 17 Sep 2017 01:55 AM IST
बरेली
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योगी सरकार बनने से पहले धर्मांतरण के मुद्दों की वजह से कई जगह तनाव फैलने की घटनाएं तक हुईं। लव जेहाद का शब्द तो कुछ नेताओं की जुबान पर आम हो गया था, लेकिन अब कोई विवाद तो सामने नहीं आ रहा है। फिर ऐसी क्या वजह है कि हिंदू युवा इस्लाम धर्म अपना रहे हैं। करेली गांव के ब्रजपाल साहू से अब्दुल्लाह बने युवक की माने तो उसकी मां ऊषा देवी और बहन राजकुमारी अभी भी हिंदू धर्म में हैं। उसने तीन साल पहले इस्लाम धर्म अपनी इच्छा से अपनाया है। अब वह गांव के कई लोगों के अलावा परिवार के भी कुछ लोगों से जान को खतरा बता रहा है। उसने पुलिस से भी शिकायत की। पुलिस ने उसकी नहीं सुनी तो अदालत की शरण ली है। अदालत में उसने भाभी शांति देवी और पड़ोसी सतीश कुमार से जान को खतरा बताया है। 
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फोटो--
मैं तीन साल पहले स्नातक करने के बाद पुणे की एक निजी कंपनी में नौकरी करने गया था। वहां अकेले रहने के दौरान सभी धर्मों के शास्त्र पढ़ने का मौका मिला। कई मुस्लिम धर्मगुरुओं की किताबों का भी अध्ययन किया। इसके बाद मेरा रुझान इस्लाम धर्म की तरफ बढ़ता गया। वहां से मैं नौकरी छोड़कर दिल्ली तुगलकाबाद में बहन के घर आकर रहने लगा। यहां से निजामुद्दीन स्थित इस्लामिक धर्मगुरुओं के मरकज में चला गया। वहीं मैंने इस्लाम धर्म कुबूल कर लिया। लेकिन जब घर पर नमाज पढ़ना शुरू की तो बहन ने विरोध कि या, लेकिन फिर भी उसे मैने समझा लिया। 2013 में सड़क हादसे में घायल होने के बाद मैं घर लौटा तो गांव में लोगों को मेरे इस्लाम धर्म अपनाने की बात पता लग गई। हिंदू संगठनों से जुड़े तमाम लोगों ने मेरे घर आकर हिंदू धर्म में वापसी के लिए समझाया लेकिन मैंने मना कर दिया। मुझ पर तमाम तरह के दबाव बनाए गए। भाभी ने गंभीर आरोप लगाए लेकिन पुलिस ने मुझे क्लीनचिट दे दी। हालांकि इस विवाद के चलते मजबूरी में मुझे अपना घर बेचना पड़ा। आसपास के लोगों ने जीना मुश्किल कर दिया था। मैं अब अपनी मां और बहन के साथ किराए पर रहता हूं। अभी भी उसे अपने गांव वालों, पड़ोसी और रिश्तेदारों से मुझे जान का खतरा बना हुआ है। चार सितंबर को भाभी शांति देवी और पड़ोसी सतीश कुमार ने मुझ पर हमला कर दिया। दोनों हिंदू धर्म में वापस आने के लिए दबाव बना रहे हैं। कहते हैं कि तुमने धर्म में वापसी नहीं की तो वे झूठे मुकदमे में फंसा देंगे। -अब्दुल्लाह, ग्राम करेली

इकलौता बेटा है, मैं क्या करूं
अब्दुल्लाह कहो या ब्रजपाल, मेरा तो वह इकलौता बेटा है। मेरा तो खून का रिश्ता है। बचपन में लोरियां देकर सुनाया है। मेरा पूरा ख्याल रखता है। मैं उससे अलग कैसे रह सकती हूं। उसके मन की बात है, जो करता है ठीक है। उससे मुझे कोई शिकायत नहीं है। मैने इस्लाम धर्म अभी कुबूल नहीं किया है। - ऊषा देवी   
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दादी शिवानी से मिलकर भावुक हो गया अली 
खून का रिश्ता कभी खत्म नहीं हो सकता। बचपन में राजा से अली हुसैन बना युवक मौका मिलते ही अपनी बूढ़ी दादी शिवानी देवी से मिल आया। इसके लिए अली ने पेटीएम कार्ड बनाने का बहाना चुना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैशलेस स्कीम का फायदा उठाते हुए अली ने अपने साथियों के साथ बदायूं के कुवंरगांव इलाके के गांवों में जाकर पेटीएम कार्ड बनाने का अनुबंध किया था। अली के पिता मंगल सिंह ने तेरह साल पहले दिल्ली जाकर इस्लाम धर्म कुबूल करने के बाद अपना नाम अली अकबर रख लिया था। अली ने बताया कि उसका परिवार कुंवरगांव का ही रहने वाला था। अली ने बताया कि पहले दादा की चिता को मुखाग्नि देने के बाद उनके पिता का मन बदल गया था। वह नशे में उसी दिन गांव के मौलाना के पास पहुंच गए थे। कहने लगे मुझे मुसलमान बना दो, लेकिन उन्होंने गांव में विवाद होने के डर से उन्हें वापस कर दिया। कहा, नशा उतर जाने पर सुबह आना। मौलाना ने उनकी नहीं सुनी तो वह दिल्ली चले गए। वहां उन्होंने इस्लाम कुबूल कर लिया और वहीं काम करने लगे। पता लगने पर उनकी मां भाग्यवती दिल्ली चली गईं। उन्होंने देखा तो हमारे वालिद का जीने का अंदाज बदल गया था। इससे नाराज होकर मां चाचा के साथ घर चली आईं। 2004 में उसके वालिद बदायूं में बड़ी सरकार की दरगाह पर आए तो परिवार वाले उन्हें पकड़कर घर ले गए। उन्हें काफी समझाया, धर्म में वापसी को मारपीट भी की गई, लेकिन उन्होंने किसी की एक नहीं सुनी। मौका पाकर वह मां और उन्हें भी दिल्ली ले गए। वहां मां ने उनके साथ इस्लाम धर्म कुबूल कर लिया। इन दिनों हमारा परिवार बड़ी विहार में रहता है। डेलापीर पर उनकी बिरयानी की मशहूर दुकान है।       

देश के हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है। धर्म परिवर्तन करने पर अब्दुल्लाह को गांव के लोग परेशान कर रहे हैं तो उन पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है। अब्दुल्लाह बालिग हैं। किसी ने उन पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव तो नहीं बनाया। पुलिस की अनदेखी करने पर उसे अदालत की शरण में जाना पड़ा, यह अफसोस की बात है। हम इस पर अधिकारियों से बात करेंगे। - मौलाना शहाबुद्दीन रजवी
विहिप के पदाधिकारी रविवार को इलाके में जाकर पूरी स्थिति की पड़ताल करेंगे। यह देखा जाएगा कि व्यक्ति का धर्मांतरण जबरदस्ती किया गया है या फिर लोभ लालच में। अगर कोई विपरीत स्थिति मिली तो दोषी के खिलाफ शिकायत होगी।
पवन अरोड़ा, जिलाध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद 
बहकावे में आकर बदलते हैं धर्म
देश में धर्मांन्तरण बढ़ गया है, लेकिन यह बस बहकावे में आकर हो रहा है। युवा लव मैरिज करते हैं और धर्म बदल लेते हैं। यह सब संस्कार विहीनता है। समाज के लिए नकारात्मक  विचारधारा है। आने वाले वंश पर इसका प्रभाव पड़ता है। इसलिए हर व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दे। - मनोज मिश्रा, पुजारी, टिबरीनाथ मंदिर  
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