लॉकडाउन के दौरान इलाज न मिल पाने के कारण सोमवार को बरेली निवासी एक गर्भवती महिला की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि वह तीन दिन से गर्भवती के इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर लगा रहे थे, मगर कहीं भी उसका इलाज नहीं हुआ। किसी भी निजी अस्पताल या महिला अस्पताल ने गर्भवती को भर्ती नहीं किया।
रोंधी टोला निवासी अब्दुल हसन के मुताबिक पत्नी सायरा नौ माह की गर्भवती थी। प्रसव काल नजदीक आने पर उसे भर्ती कराने के लिए पहले घर के पास के अस्पताल ले गए, मगर कोई मदद नहीं मिली। किसी तरह वाहन की व्यवस्था कर शनिवार को वह जिला महिला अस्पताल पहुंचे।
वहां पता चला कि अस्पताल की ओपीडी बंद है। वहां मौजूद गार्ड से उन्होंने पत्नी के इलाज के बारे में पूछा। आरोप है कि गार्ड ने लॉकडाउन की वजह से इलाज न मिल पाने की बात कही। ऐसे में वह मायूस होकर लौट आए।
रविवार की देर रात पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो उसे लेकर मीरा की पैठ स्थित एक अस्पताल गए। अस्पताल के गेट पर ताला था। वह लगातार डॉक्टर और स्टाफ को आवाज देते रहे मगर कोई मदद नहीं मिली। दर्द से कराह रही पत्नी को लेकर दूसरे अस्पताल जाने लगे तभी रास्ते में मौत हो गई।
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा ने आरोपों को तथ्यहीन और निराधार बताया। कहा कि महिला के परिजनों ने किसी बाहरी व्यक्ति से अस्पताल में सेवाओं के बारे में सूचना ली होगी इसलिए गलत जानकारी होने से वह अस्पताल से चले गए, जबकि महिला अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं चल रही हैं और हर दिन करीब 7 से 10 ऑपरेशन हो रहे हैं।