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पीलीभीत: अंधविश्वास में बच्चे का हुआ था कत्ल, 4 साल बाद स्पेशल जज ने सुनाई ये सजा

Fri, 23 Nov 2018 01:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पीलीभीत
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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संतान प्राप्ति के लिए अंधविश्वास में दस वर्षीय एक दलित की हत्या करने वाली एक महिला और उसके प्रेमी को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह घटना चार साल पहले शहर से सटे गांव रूपपुर कमालू में हुई थी। 

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अनुसूचित जाति के गेंदनलाल का दस वर्षीय पुत्र प्रांशु 21 नवंबर 2014 को शाम पांच बजे गायब हो गया था। दो दिन बाद उसका शव गांव के पास गन्ने के खेत में मिला। उसका बायां कान और पैर का कुछ हिस्सा कटा हुआ था। पहले माना गया कि जंगली जानवर के खाने से ऐसा हुआ लेकिन गले पर भी कटे का निशान मिलने से हत्या का शक हुआ। सुनगढ़ी थाना पुलिस ने जब पोस्टमार्टम कराया तो स्पष्ट हो गया कि धारदार हथियार से प्रहार कर हत्या की गई। 

वहीं विवेचना में हत्यारों का भी पता चल गया। विवेचना के मुताबिक थाना बरखेड़ा के गांव पिपरिया मंडन निवासी पप्पू उर्फ दुर्गेश शर्मा राजगीरी का काम करता था। रुपपुर कमालू में मकान बनाते समय ओमवती मौर्या से उसकी दोस्ती हो गई। ओमवती के कोई बच्चा नहीं था।
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दुर्गेश ने उसे बताया कि वह तंत्र विद्या जानता है। इसके बाद संतान प्राप्ति के लिए दोनों ने प्रांशु का अपहरण कर तंत्र साधना के लिए उसकी हत्या की और शव गन्ने के खेत में फेंक दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। 

मामले की सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता धीरेंद्र मिश्र और अभियोजन अधिकारी जेपी वर्मा ने पीड़ित पक्ष की ओर से 11 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए। मामले की सुनवाई के बाद स्पेशल जज (एससीएसटी एक्ट) रामचंद्र ने पप्पू और ओमवती मौर्या को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों को जेल भेज दिया गया।

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