एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के चलते कैंपस में संचालित डिप्लोमा कोर्सों की हालत काफी खस्ता है, काफी समय से इन कोर्स में एडमिशन तक नहीं हुए हैं, जिसके चलते शैक्षिक सत्र 2017-18 में कई कोर्स बंद भी हो सकते हैं।
पिछले दो साल से मास्टर ऑफ रूरल डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट (एमआरडीएम) में प्रवेश नहीं हुए, जबकि उससे पहले इसमें कई एडमीशन हुए थे। मास कम्यूनिकेशन एंड इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिज्म, पीजीडीसीए, एप्लाइड क्लीनिकल साइकोलॉजी, अप्लाइस साइकोलॉजी का भी यही हाल है। आठ डिप्लोमा कोर्स, जिसमें चालीस के हिसाब 320 सीटें हैं, जबकि शैक्षिक सत्र 2016-17 में बमुश्किल 111 एडमीशन हुए।
विश्वविद्यालय प्रशासन एडमीशन के दौरान इन कोर्स के लिए प्रचार-प्रसार ही नहीं करता, विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर एक नोटिस मात्र जारी किया जाता है। जानकारी न होने के कारण इन कोर्स में प्रवेश ही नहीं हो पाते, जबकि इन कोर्स की अच्छी डिमांड है। इन कोर्स के प्रभारी की मानें तो अगर इन कोर्स को तरजीह दी जाती तो यह हालात नहीं होते। अब शैक्षिक सत्र 2017-18 में इन कोर्स पर बंद होने कार खतरा मंडराने लगा है अगर छह से कम एडमीशन होते हैं तो उसमें परीक्षा नहीं कराई जा सकती है।
किस कोर्स में कितने हुए एडमिशन
कोर्स एडमिशन
एमआरडीएम शून्य
पीजी डिप्लोमा महिला
सशक्तिकरण और विकास 7
पीजी डिप्लोमा उद्यमिता 9
एमएसडब्ल्यू 40
पीजीडीसीए 22
मास कम्यूनिकेशन एंड
इलेक्ट्रॉनिक जर्नालिज्म 6
एप्लाइड साइकोलॉजी 14
क्लीनिकल साइकोलॉजी 13
नोट : सभी कोर्स में चालीस सीटें हैं।
किसी भी कोर्स में एडमिशन के लिए जरूरी है उसका प्रचार प्रसार जो हमारे यहां नहीं हो पाता। इसलिए ही प्रवेश का ग्राफ गिरा है। इस बार डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए बेहतर प्रयास किए जाएंगे।
- प्रोफेसर अभय सिंह, उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और एमआरडीएम के डीन
एडमीशन के दौरान प्रचार प्रसार, नोटिस जारी करना, विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। इस बार मैंने अपने स्तर से बहुत कोशिश की नहीं तो इस बार ही कई कोर्स में प्रवेश का आंकड़ा शून्य होता है।
- प्रोफेसर एनपी सिंह, एमएसडब्ल्यू, पीजीडीसीए व अन्य कोर्स के प्रभारी डीन