बरेली। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम कटने के बाद राजनीतिक दलों के संभावित प्रत्याशियों की धड़कन बढ़ा दी है। बरेली के सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों में हुआ यह बदलाव चुनाव में जातिगत संतुलन और वोटों के ध्रुवीकरण के गणित को प्रभावित कर सकता है।
बरेली शहर, कैंट, भोजीपुरा, नवाबगंज, फरीदपुर, बिथरी चैनपुर, आंवला, मीरगंज और बहेड़ी विधानसभा क्षेत्रों में हजारों मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं। इनमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मतदाता शामिल हैं। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। किस वर्ग और जातीय समूह के मतदाता ज्यादा प्रभावित हुए हैं, यह चिंता हर राजनीतिक दल को है। अगर किसी एक वर्ग के नाम अपेक्षाकृत ज्यादा घटे तो इससे कई सीटों पर परंपरागत वोट बैंक कमजोर पड़ सकते हैं। यही स्थिति नए ध्रुवीकरण की वजह भी बन सकती है। लिहाजा, प्रत्येक सीट पर अब नए सिरे से मंथन जरूरी है।
इसके अलावा कई सीटों पर उम्मीदवारों के चयन, प्रचार की दिशा और मुद्दों की प्राथमिकता तक बदल सकती है। हालांकि, सबकी नजर इस बात पर भी टिकी है कि कितने मतदाता छूटे हैं और सूची में शामिल होने से वे कारगर साबित होंगे या नहीं। बहरहाल, मुद्दा केंद्रीय चर्चा का विषय है।