सरकार मुफ्त सुविधा दे रही तो निजी अस्पताल क्यों आया
डॉक्टर ने मरीज के परिजन से कहा कि सरकार मुफ्त सुविधा दे रही है तो सरकारी अस्पताल में इलाज क्यों नहीं करा रही? मरीजों को निजी अस्पताल क्यों आना पड़ रहा है? जिला अस्पताल का बजट यहां से 10 गुना ज्यादा है, जिसे नेता और डॉक्टर मिलकर खा जाते हैं। परिजन ने छह हजार का इंजेक्शन लगाने के बदले रसीद मांगी तो डॉक्टर बोले कि- तुम्हें रसीद दे दूं तो बाहर निकलकर तुम शिकायत करोगे। आखिरी के तीन मिनट के वीडियो में डॉक्टर कहते हुए दिख रहे हैं कि तुम रोते हुए लोग हो, जिंदगी भर रोओगे। सरकारी इलाज में न ज्ञान है, न सुविधा। मेरे अस्पताल से निकल जाओ। मेरे सामने मत पड़ना। स्टाफ से बोले कि छुट्टी कर बाहर निकाल दो। पेमेंट न करें तो दरवाजा बंद रखना। भर्ती मरीज से कहा कि तुम बाहर नहीं जा सकती। सुविधा चाहिए तो अस्पताल का पेमेंट करो।
वीडियो वायरल होने पर डॉक्टर के बदले सुर
वायरल वीडियो पर डॉ. सोमेश मेहरोत्रा का कहना है कि आयुष्मान योजना सरकार की कल्याणकारी योजना है। इसमें अलग-अलग रोगों के इलाज की दर तय है। एक बीमारी के इलाज पर पूरे पांच लाख रुपये अस्पताल को नहीं मिलते। मरीज पैरालिसिस का था, जिसका इंजेक्शन छह हजार रुपये का है। उसे 22 सौ में कैसे लगा दूं? मरीज के पहुंचने पर अप्रूवल लेने के बाद ही इलाज शुरू होता है। मरीज की हालत गंभीर थी, इसलिए इंजेक्शन लगा दिया। हालत में सुधार भी हुआ, लेकिन लड़का समझने को तैयार नहीं था। मैंने आवेश में आकर बातें कहीं। नेताओं से मेरी कोई शिकायत नहीं है। जिला अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के तहत बेहतर इलाज होता है। मेरे अस्पताल का चार माह का आयुष्मान कार्ड से किए गए इलाज का भुगतान नहीं हो रहा, इससे परेशान हूं। मेरी परेशानी को भी मानवीय पक्ष से देखा जाना चाहिए।
जिन चिकित्सकों का यूपी एमसीआई में पंजीकरण नहीं है, उनके द्वारा आयुष्मान इलाज संबंधी बिल का भुगतान नहीं हो रहा। प्रदेश सरकार और यूपी एमसीआई को पत्र लिखा है। आयुष्मान योजना में पैकेज सिस्टम होता है। तीमारदार को समझाने के दौरान डॉक्टर के शब्दों का चुनाव गलत रहा। अगर भुगतान नहीं करना है तो मरीज के इलाज का अप्रूवल भी सरकार को नहीं देना चाहिए। - डॉ. आरके सिंह, अध्यक्ष आईएमए