बरेली। परसाखेड़ा आवासीय योजना के लिए लैंड पूलिंग स्कीम में तमाम किसान आवास विकास परिषद को जमीन देने के लिए अब तक तैयार नहीं हुए हैं। दो साल में 561 हेक्टेयर में से सिर्फ 67 हेक्टेयर जमीन के लिए सहमति मिली है। ऐसे में अधिग्रहण के विकल्प पर मंथन के साथ प्रस्ताव तैयार करके भेजा गया है। योजना का ले-आउट भी मुख्यालय भेजा जा चुका है।
यह आवासीय योजना टियूलिया, धंतिया, हमीरपुर, वोहित, फरीदापुर रामचरण, बल्लिया और मिलक इमामगंज गांव की जमीन पर प्रस्तावित है। प्रस्तावित आवासीय योजना में 12 सेक्टर हैं। टियूलिया, धंतिया में प्रस्तावित चार सेक्टरों के लिए लैंड पूलिंग स्कीम में 67 हेक्टेयर जमीन के लिए ही सहमति मिली है। चौथे सेक्टर के लिए भी कई किसानों ने जमीन देने पर सहमति नहीं दी है।
इस बीच योजना का ले-आउट आवास एवं विकास परिषद के मुख्यालय को मंजूरी के लिए भेज तो दिया गया, मगर सबसे बड़ा पेच भू-स्वामियों की सहमति का फंस गया है। आवास आयुक्त की ओर से और अधिक भू-स्वामियों से सहमति लेने के निर्देश दिए गए। इसके बाद किसानों व अन्य भू-स्वामियों से परिषद के स्थानीय अधिकारियों-कर्मचारियों ने एक बार फिर संपर्क साधा है। अगर वे सहमति नहीं देते हैं तो जमीन का अधिग्रहीत ही किया जाएगा। आवास एवं विकास परिषद के सामने जमीन अधिगृहीत करना ही अंतिम रास्ता है। तमाम किसान भी मुआवजा लेकर जमीन देना चाहते हैं। उसमें उन्हें ज्यादा फायदा नजर आ रहा है। आवास विकास परिषद के अधिकारी इसकी प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव भेज चुके हैं। ब्यूरो