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काकोरी के शहीदों के सम्मान में लिखे गीतों को अपनी आवाज देने को तैयार थीं लता मंगेशकर

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शरद राही । - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। अजीब दास्तां हैं ये... लग जा गले... तुझसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान हूं मैं... जैसे अनगिनत गीतों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। भले ही लता जी ने शहीदों की सरजमीं पर कभी कदम नहीं रखा, पर उन्हें यहां के इतिहास के बारे में बखूबी पता था। युवक बिरादरी के प्रदेश संचालक शरद राही की लता मंगेशकर से मुंबई में मुलाकात हुई थी। परिचय के दौरान लता जी को काकोरी कांड के शहीदों के नाम बताने पर उन्होंने कहा था कि आप बहुत पवित्र भूमि से आए हो। वह शहीदों के सम्मान में लिखे गीतों को अपनी आवाज देने को सुर रत्न तैैयार थी।
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यह बात 1985 की है। युवक बिरादरी का एक सुर-एक ताल कार्यक्रम का प्रशिक्षण मुंबई के एक होटल में हुआ था। इसमें युवक बिरादरी के प्रदेश संचालक शरद राही व सुनील कपूर ने उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया था। शरद राही बताते हैं कि कार्यशाला में स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के आने को लेकर सभी उत्साहित थे। संगीतकार सलिल चौधरी के साथ लता मंगेशकर आईं थीं। उनके लिए बीच में कुर्सी डाली गई थी। बेहद सौम्य और आवाज की जादूगर लता मंगेशकर ने एक-एक व्यक्ति से परिचय लिया था।
शरद राही ने शाहजहांपुर का परिचय दिया तो उनका सवाल था कि यह किस ओर पड़ता है। काकोरी कांड के अमर नायक शहीद अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह और रामप्रसाद बिस्मिल का नाम बताने पर उनके चेहरे के भाव बदल गए। बोलीं कि हां, मैंने शहीदों के बारे में पढ़ा है। आप तो बहुत ही पवित्र भूमि से आए हैं। उन्होंने गीतकार कुलदीप सिंह से कहा था कि काकोरी कांड के अमर नायकों के सम्मान में गीत लिखें। वह शहीदों के गीतों को अपनी आवाज देंगी।
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तीन घंटे चले कार्यक्रम में स्वरों पर हुई थी चर्चा
-एक सुर-एक ताल में आईं लता मंगेशकर का कार्यक्रम करीब तीन घंटे तक चला था। शरद राही ने बताया कि परिचय के बाद उनका सारा फोकस स्वर पर था। गीत-संगीत के बारे में उन्होंने विस्तार से चर्चा की थी। राही कहते हैं कि लता मंगेशकर का दुनिया से जाना एक अपूर्णनीय क्षति है। अपनी आवाज के जरिए वह करोड़ों दिलों पर राज करती थीं।
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