बरेली। मानसून के बदले मिजाज से इस वर्ष जून-जुलाई में मंडरा रहे बादलों ने जमकर बारिश की। वहीं, पिछले वर्ष आंशिक सूखे की आशंका रही। एक ओर धान की बोआई में देरी हुई तो दूसरी ओर सितंबर, अक्तूबर में बेमौसम बारिश से खेत जलमग्न हो गए थे।
मौसम विज्ञान केंद्र से प्राप्त जानकारी के मुताबिक पिछले साल जून में एक बार पश्चिमी विक्षोभ घिरा था। चार दिनों में 83 मिमी बारिश हुई थी। जुलाई में पांच बार पश्चिमी विक्षोभ बना और 240 मिमी बारिश हुई थी। यह सामान्य से करीब 30 फीसदी कम हुई थी। मानसून हावी होने पर 300-350 मिली बारिश सामान्य होती है। लिहाजा, जिले के कुछ क्षेत्र के लोगों को आंशिक सूखे का सामना पड़ा था।
इस वर्ष जून में तीन पश्चिमी विक्षोभ घिरा और 159 मिमी और जुलाई में नौ बार पश्चिमी विक्षोभ बना और 452 मिमी बारिश हुई। कुछ क्षेत्र में जलप्रवाह की स्थिति बनी। हालांकि, अंतराल पर तेज गति से बारिश होने से बाढ़ की स्थिति नहीं बन सकी। मौसम विशेषज्ञ अतुल कुमार के मुताबिक अगस्त की शुरुआत से ही बारिश के अनुकूल माहौल बना हुआ है।
अब सिंचाई के लिए परेशान नहीं हुए किसान
पिछले वर्ष किसानों को मौसम की मार सहनी पड़ी थी। बारिश न होने पर फसल बोआई के लिए वैकल्पिक सिंचाई की व्यवस्था करनी पड़ी थी। पंपिंग सेट से सिंचाई पर प्रतिघंटे 300 से 400 रुपये लिए थे। हालांकि, अबकी बार यह स्थिति नहीं बनी। सिंचाई के लिए किसानों को खर्च से राहत मिली है। अनुकूल माहौल बनने से खेतों में बोआई हुई।