बरेली। इज्जतनगर में रेलवे ट्रैक पर मिले शव की गलत पहचान कर एक परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया था। रविवार को मृतक चंद्रिका यादव के परिजन ने पुआल का शव बनाकर अंत्येष्टि की।
शुक्रवार को डिफेंस कॉलोनी निवासी रेलवे के लोको पायलट पद से सेवानिवृत्त चंद्रिका प्रसाद की ट्रेन की चपेट में आकर मौत हो गई थी। सूचना पर पहुंचे केशव ने शव की पहचान पिता मंशालाल के रूप में कर ली। पुलिस ने पोस्टमाॅर्टम के बाद शव केशव को सौंप दिया। केशव ने उसकी अंत्येष्टि कर दी।
केशव ने अमर उजाला को बताया कि शनिवार को जब घर की कुंडी बजी तो वह बाहर निकले। वहां पिता मंशालाल को जीवित खड़े थे। केशव उनको लेकर बैरियर वन चौकी पहुंचे। वहीं चंद्रिका यादव की गुमशुदगी दर्ज कराने उनके परिजन भी पहुंचे थे। परिजन ने कपड़े देखकर रेलवे लाइन पर मिले शव की पहचान चंद्रिका यादव के रूप में की। चंद्रिका यादव के बेटे अखिलेश और आलोक ने रविवार को पुआल का शव अर्थी पर रखकर अंत्येष्टि की। इसके बाद अस्थियां विसर्जित कर दीं। ब्यूरो
जिस लाइन पर ट्रेन चलाई उसी पर हुई मौत
बेटे आलोक ने बताया कि पिता चंद्रिका यादव ने लोको पायलट रहते इज्जतनगर और काठगोदाम के बीच कई साल ट्रेन चलाई थी। अब उसी लाइन पर ट्रेन की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। केशव के पिता मंशालाल भी रेलवे से सेवानिवृत्त हैं। मंशालाल ने बताया कि वह घर से दूर गिरधारीपुर में अकेले किराये पर रहते हैं। फोन भी नहीं रखते। इसलिए परिवार से ज्यादा संपर्क नहीं रहता। इधर, चंद्रिका यादव के पुत्र शैलेश यादव की भी पांच साल पहले बरेली जंक्शन पर ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
एक परिवार में खुशी, दूसरे में छाया मातम
शव की गलत शिनाख्त के कारण पहले केशव के परिवार में मातम छा गया। अगले दिन मंशालाल जीवित घर पहुंचे तो खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं, जब चंद्रिका यादव की मौत और अंतिम संस्कार होने की सूचना उनके परिजन को मिली तो उनके घर में मातम पसर गया।