मोतियाबिंद के आपरेशन कराने के बाद आंखों में जाल बनने की समस्या पर लेजर मशीन से उपचार किया जाता है। जिला अस्पताल में रखी मशीन दो महीने से खराब पड़ी है। मरीज आंख की समस्या लेकर आ रहे हैं और निराश होकर लौट रहे हैं। कुछ मरीज समस्या बढ़ने से पहले 2000 रुपये खर्च करके निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवा चुके हैं। बताया जा रहा है कि लखनऊ में टेंडर न होने की वजह से मशीन की खरीद रुक ी हुई है।
याग लेजर मशीन का उपयोग जिला अस्पताल में नेत्र विशेषज्ञ डॉ. एके गौतम ही करते हैं। वह मंगलवार और शुक्रवार को इससे मरीजों के नेत्र को साफ करते थे। लेजर मशीन के दिन ओपीडी में 20 से 40 मरीज इलाज करवाने आते हैं। दो माह पहले मशीन खराब हुई तो इसके कंपनी इंजीनियर को बुलाया गया, उसने मशीन को कंडम घोषित कर दिया। अब मशीन के लिए न तो अस्पताल के पास बजट है और न ही स्वास्थ्य विभाग के पास। 20 लाख रुपये में आने वाली मशीन के लिए टेंडर होना जरूरी है।
अंधता निवारण कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. आलोक चंद्रा ने बताया कि लखनऊ में ई-टेंडर होने हैं, उसी में मशीन खरीदी जाएगी। अभी टेंडर नहीं हुए हैं, जिसके चलते मशीन नहीं आ सकी है। जून तक मशीन आने की संभावना है।
लेजर मशीन के लिए शासन को दो बार पत्र लिखा जा चुका है। वहां मशीन की खरीद होते ही बरेली में जून तक यह आ जाएगी।
- डॉ. विजय यादव, सीएमओ