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Bareilly News: दादा थे जमींदार... अब मजदूरी को मजबूर सौ बीघा के जोतदार, कटरी में भूमाफिया ने कब्जा ली जमीन

Wed, 18 Jan 2023 03:53 PM IST
मुकेश कुमार अमित सक्सेना, अमर उजाला बरेली

सार

रायपुर हंस में कभी जमींदार रहे लोगों के वंशज ड्राइवर और प्लंबर बनकर शहरों में वक्त काट रहे हैं, क्योंकि उनकी जमीनों पर भू-माफिया का कब्जा है। कुछ लोगों ने दहशत में, कुछ ने बेवजह विवाद से बचने के लिए जमीन और गांव दिया है।
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भिखारी सिंह का नाती रामनपाल, भाई ओमकार औ क्यारा गांव निवासी सतीश सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हम आजादी का अमृत महोत्सव मनाकर बैठे हैं। लोकतंत्र में सबको हक देने के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन रामगंगा की कटरी में आज भी दबंगों का अलिखित कानून चलता है। रायपुर हंस में कभी जमींदार रहे लोगों के वंशज ड्राइवर और प्लंबर बनकर शहरों में वक्त काट रहे हैं, क्योंकि उनकी जमीनों पर भू-माफिया का कब्जा है। दबंगों की कब्जा नीति से आहत तमाम संपन्न लोग भी गांव से पलायन कर गए हैं।

केस- 1 

रायपुर हंस निवासी ठाकुर भिखारी सिंह की गिनती जमींदारों में होती थी। उनकी सौ बीघा जमीन दबंगों ने कब्जा ली। उनकी हाल ही में मृत्यु हुई है। उनके पोते रमनपाल सिंह ड्राइवर हैं। दूसरे पोते देवेंद्र मुरादाबाद से गोरखपुर प्राइवेट गाड़ी चलाते हैं। उनके एक बेटे वीरपाल शहर में रहकर प्लंबर का काम करते हैं। 
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भिखारी सिंह के भतीजे शिव कुमार पचौमी की एक फैक्टरी में काम करते हैं तो दूसरे भतीजे राजकुमार हल्द्वानी में एक क्रेशर के कर्मचारी हैं। एक भाई ओमकार के दो बेटे पशुपालन से परिवार चलाते हैं। भिखारी सिंह के एक बेटे सुरेंद्र पाल जमीन की नापजोख कराने गए थे तो रामगंगा में डूबकर उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी लंबी कानूनी लड़ाई लड़कर जमीन न ले सकीं तो मायके जाकर रहने लगीं।

केस- 2

80 बीघा के जोतदार सोमपाल व रामपाल के परिवार की जमीन पर भी दबंगों कब्जा है। रामपाल के एक बेटे संजय बटाई पर खेती और दूसरे कल्लू पशुपालन करके आजीविका चला रहे हैं। इनके भाई ओमपाल के छह बेटों को भी एक इंच जमीन नहीं मिली। वह दिल्ली व जयपुर में काम कर रहे हैं। सतीश सिंह की 40 बीघा जमीन पर भी कब्जा है। 

सिद्धपाल 25 बीघा के मालिक थे, उनके दोनों बेटे बाहर प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं। गांव के एक प्रभावशाली व्यक्ति पुलिस विभाग से रिटायर होकर फरीदपुर में रह रहे हैं। उनकी तीस बीघा जमीन दबंगों के कब्जे में है। गांव के 32 पट्टेदारों में से 17 की जमीन भी माफिया के कब्जे में है। लोग शिकायतें करके थक चुके थे, कटरी कांड के बाद वह फिर कब्जे हटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

परमवीर के कब्जे में बताई जा रही ज्यादा जमीन

रायपुर हंस गांव की अधिकतर जमीन पहले सुरेश प्रधान के कब्जे में थी। सुरेश ने ही अपनी पकड़ ढीली होती देखकर परमवीर को बुलाकर जमीनों पर कब्जे करा दिए। अब काश्तकारों की अधिकांश जमीन परमवीर के कब्जे में बताई जा रही है। 
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आरोपी सुरेश प्रधान और परमवीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
सूत्र बताते हैं कि अब सुरेश प्रधान की भी इच्छा है कि किसानों की जमीन परमवीर के कब्जे से मुक्त हो जाए। सुरेश की हालत में काफी सुधार है। उससे मिलने अस्पताल जाने वाले लोगों ने बताया कि सुरेश ने उनसे कहा कि उसके कब्जे में उन लोगों की जमीन नहीं है। वह लोग पैमाइश कराकर अपनी जमीनें खाली करा लें।

कब्जामुक्त कराएगी सरकारी जमीन 

डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने बताया कि दबंगों के खिलाफ अभियान चलाकर सरकारी जमीन खाली कराई जा रही है। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर भू-माफिया घोषित करने की कार्रवाई विचाराधीन है। अगर किसान कब्जे की शिकायत करेंगे तो संबंधित जमीन की पैमाइश कराकर स्थिति दिखवा ली जाएगी। 

एसएसपी अखिलेश चौरसिया ने कहा कि फरीदपुर थाना क्षेत्र में हुए तिहरे हत्याकांड के बाद दोनों पक्षों पर कार्रवाई की गई है। इन्हें भू-माफिया घोषित किया जाएगा। प्रशासन की मदद से संपत्ति का चिह्नीकरण व जब्तीकरण भी किया जाएगा। किसानों को उनका हक दिलाने के लिए टीम बनाकर काम किया जा रहा है। 
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