केस- 2
80 बीघा के जोतदार सोमपाल व रामपाल के परिवार की जमीन पर भी दबंगों कब्जा है। रामपाल के एक बेटे संजय बटाई पर खेती और दूसरे कल्लू पशुपालन करके आजीविका चला रहे हैं। इनके भाई ओमपाल के छह बेटों को भी एक इंच जमीन नहीं मिली। वह दिल्ली व जयपुर में काम कर रहे हैं। सतीश सिंह की 40 बीघा जमीन पर भी कब्जा है।
सिद्धपाल 25 बीघा के मालिक थे, उनके दोनों बेटे बाहर प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं। गांव के एक प्रभावशाली व्यक्ति पुलिस विभाग से रिटायर होकर फरीदपुर में रह रहे हैं। उनकी तीस बीघा जमीन दबंगों के कब्जे में है। गांव के 32 पट्टेदारों में से 17 की जमीन भी माफिया के कब्जे में है। लोग शिकायतें करके थक चुके थे, कटरी कांड के बाद वह फिर कब्जे हटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
परमवीर के कब्जे में बताई जा रही ज्यादा जमीन
रायपुर हंस गांव की अधिकतर जमीन पहले सुरेश प्रधान के कब्जे में थी। सुरेश ने ही अपनी पकड़ ढीली होती देखकर परमवीर को बुलाकर जमीनों पर कब्जे करा दिए। अब काश्तकारों की अधिकांश जमीन परमवीर के कब्जे में बताई जा रही है।
आरोपी सुरेश प्रधान और परमवीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
सूत्र बताते हैं कि अब सुरेश प्रधान की भी इच्छा है कि किसानों की जमीन परमवीर के कब्जे से मुक्त हो जाए। सुरेश की हालत में काफी सुधार है। उससे मिलने अस्पताल जाने वाले लोगों ने बताया कि सुरेश ने उनसे कहा कि उसके कब्जे में उन लोगों की जमीन नहीं है। वह लोग पैमाइश कराकर अपनी जमीनें खाली करा लें।
कब्जामुक्त कराएगी सरकारी जमीन
डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने बताया कि दबंगों के खिलाफ अभियान चलाकर सरकारी जमीन खाली कराई जा रही है। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर भू-माफिया घोषित करने की कार्रवाई विचाराधीन है। अगर किसान कब्जे की शिकायत करेंगे तो संबंधित जमीन की पैमाइश कराकर स्थिति दिखवा ली जाएगी।
एसएसपी अखिलेश चौरसिया ने कहा कि फरीदपुर थाना क्षेत्र में हुए तिहरे हत्याकांड के बाद दोनों पक्षों पर कार्रवाई की गई है। इन्हें भू-माफिया घोषित किया जाएगा। प्रशासन की मदद से संपत्ति का चिह्नीकरण व जब्तीकरण भी किया जाएगा। किसानों को उनका हक दिलाने के लिए टीम बनाकर काम किया जा रहा है।