बरेली। योगी सरकार का सबसे महत्वपूर्ण अभियान होने के बावजूद भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर जिले में जिस तरह खेल हुआ, उसकी दूसरी मिसाल मिलनी मुश्किल है। हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के दो बड़े भूमाफिया के खिलाफ दो साल लंबे पत्राचार के बाद भी कुछ समय पहले तक यहां तैनात रहे जिला प्रशासन के अफसर ने शासन और कमिश्नर कार्यालय को जांच रिपोर्ट नहीं भेजी गई। अब कमिश्नर कार्यालय ने एक बार फिर इस संबंध में डीएम को पत्र लिखा है।
दोनों भूमाफिया के खिलाफ अक्तूबर 2016 में शासन को तमाम साक्ष्यों के साथ शिकायतें भेजी गई थीं। प्रदेश में भाजपा की सरकार स्थापित होने के साथ 2017 की शुरुआत में ही शासन की ओर से इस प्रकरण में जांच का आदेश देते हुए रिपोर्ट मांगी गई थी। कमिश्नर कार्यालय के जरिये शासन का यह आदेश जिला प्रशासन को भेज दिया गया था, इसके बाद शासन से रिमाइंडर पर रिमाइंडर आते रहे और कमिश्नर कार्यालय से भी लगातार जिला प्रशासन से जांच की प्रगति के बारे में पूछा जाता रहा लेकिन जिला प्रशासन की ओर से लौटकर कोई जवाब नहीं आया।
दो सालों के वक्त में दर्जन भर से ज्यादा रिमाइंडर शासन से जारी होने के बावजूद अब तक इस प्रकरण में शासन को भूमाफिया के खिलाफ जांच रिपोर्ट नहीं भेजी जा सकी है। सूत्रों के मुताबिक दोनों भूमाफिया पर करोड़ों रुपये कीमत की सरकारी जमीनों पर कब्जा किए जाने का आरोप है। शिकायतों में यह भी कहा गया था कि इन भूमाफिया ने बड़े पैमाने पर काला धन इकट्ठा किया है। अब एक बार फिर कमिश्नर की ओर से अपर आयुक्त प्रशासन अरुण कुमार ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस प्रकरण की जांच आख्या शासन के साथ कमिश्नर कार्यालय को उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।