बरेली। जिले के 32 गांवों से होकर गुजरने वाली 29 किमी लंबी रिंग रोड के लिए जमीन देने वाले तीन हजार काश्तकारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। डेढ़ साल में 78 फीसदी यानी करीब नौ हजार काश्तकारों को 585 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष 167 करोड़ रुपये का वितरण अटका हुआ है। मुआवजे में देरी के कारण कुछ किसान निर्माण कार्य रोककर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
नियमों के अनुसार, 80 फीसदी भूमि का मुआवजा वितरित होने के बाद ही काम शुरू किया जा सकता है। कार्यदायी संस्था एनएचएआई द्वारा मिट्टी डाली जा रही थी, लेकिन पस्तोर और आसपास के गांवों के किसानों ने इसका विरोध कर दिया। इस कारण एनएचएआई ने कार्य रोक दिया है। पस्तोर के 60, सरनिया के 15, रोठा के 40 और महेशपुर अटरिया के 15 काश्तकारों सहित कई अन्य गांवों के किसानों का मुआवजा शेष है।
भुगतान में देरी के कारण एनएचएआई ने एक माह से कोई भुगतान नहीं किया है। इससे करीब 50 काश्तकारों का भुगतान प्रभावित हुआ है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी देश दीपक सिंह ने बताया कि तहसीलों से अभिलेख न आने और कुछ गांवों का अवार्ड देरी से होने के कारण भुगतान रुका है।
ये हैं प्रभावित गांव
धंतिया, परसाखेड़ा, रसूला चौधरी, रहपुरा जागीर, बल्ला कोठा, बादशाहनगर, सरनिया, महेशपुर अटरिया, रोठा मुस्तकिल, रोठा एहतमाली, सहसिया हुसैनपुर एहतमाली, सहसिया हुसैनपुर मुस्तकिल, सराय तल्फी मुस्तकिल, महगवां उर्फ ऊंचागांव, बिरिया नारायणपुर, इटौवा सुखदेवपुर, बेहती देहा जागीर, रौंधी मुस्तकिल, महेशपुर ठाकुरान, बुखारा, चौबारी मुस्तकिल, बारी नगला, उमरसिया, लखौरा, दुबराई, पलपुर कमलपुर, दारूपुर ठकुरान, पार्थसपुर, सैदपुर लछरी, सुंदरपुर और रजऊ परसपुर।