बेड़े में नहीं ये बसें, फिर भी पास कर दिए बिल
बस संख्या 1705, 1754, 1620 और 3045 बरेली डिपो के बेड़े में ही नहीं हैं। इन बसों की भी मरम्मत कर बिल बना दिए गए। सीनियर फोरमैन ने इनको पास भी कर दिया। सेवा प्रबंधक ने जांच की तो पता लगा कि सितंबर में सात लाख रुपये से ज्यादा के बिलों में अनियमितताएं हैं। 59 हजार रुपये से ज्यादा के एक अन्य बिल का भी सत्यापन कर दिया गया। अगस्त के बिलों में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ी पाई गई।
बरात में बवाल: नशे में धुत बरातियों की हरकत दूल्हे पर पड़ी भारी, दुल्हन ने किया शादी से इनकार
सीनियर फोरमैन ने स्वीकारी गड़बड़ी
सीनियर फोरमैन नवाबुद्दीन ने बताया कि थाने में खड़ी बस की मरम्मत का फर्जी बिल बनाया गया था। जो गाड़ियां डिपो में हैं ही नहीं, उनकी भी मरम्मत दर्शाते हुए बिल सत्यापित करा लिए गए। इस संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को बताया गया है। संबंधित फर्म ने गड़बड़ी की है।
बिना कमानी वाली बस में करा दिया कमानी का काम
बरेली डिपो की बसों में तमाम ऐसे काम भी किए गए हैं जो फर्म की रेट लिस्ट में शामिल ही नहीं हैं। बीएस-6 श्रेणी की नई बसों की मरम्मत के बिल भी पास किए गए हैं। इन बसों में जो पुर्जे ही नहीं होते, उनके बिलों का भी भुगतान कर दिया गया है। जिन बसों में एक फैन बेल्ट होती है, उनमें दो फैन बेल्ट के बिल पास किए गए हैं। लीलैंड की जिन बसों में कमानी ही नहीं होती, उनमें कमानी के काम दर्शाते हुए बिल बनाए गए हैं।
Bareilly News: तीन लोगों की मौत के बाद जागा पीडब्ल्यूडी, अधूरे पुल पर चार जगह कराई बैरिकेडिंग
पिछले साल भी खुला था घोटाला, काली सूची में डाली गई फर्म
मरम्मत के नाम पर घपले का खुलासा पिछले साल भी हुआ था। उस समय साईं इंटरप्राइजेज फर्म का भुगतान रोकने के बाद उसे काली सूची में डाल दिया गया था। इस मामले में तत्कालीन सेवा प्रबंधक संजय यादव पर भी आरोप लगे थे। बाद में उनका तबादला गोरखपुर कर दिया गया था। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का भुगतान भी रोक दिया गया था। बाद में मरम्मत के लिए नई फर्म का चयन किया गया। अब एक बार फिर घपला सामने आया है।
परिवहन निगम के सेवा प्रबंधक धनजी राम ने बताया कि कुछ गलत बिल आए थे। उनका भुगतान नहीं किया गया है। संबंधित फर्म के भुगतान से एक बार चार और एक बार तीन लाख रुपये की कटौती की गई है। बिलों में गड़बड़ी को लेकर सीनियर फोरमैन को नोटिस भी दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जरूरी कार्रवाई की जाएगी।