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नारी शक्ति से संवाद: महिला पुलिसकर्मी... जो परिवार की जिम्मेदारियों से ऊपर रखती हैं खाकी का फर्ज

Thu, 25 Sep 2025 08:56 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

शारदीय नवरात्र पर अमर उजाला कार्यालय में बृहस्पतिवार को आयोजित संवाद में पुलिस महकमे के विभिन्न इकाइयों से महिला पुलिसकर्मी पहुंचीं। उन्होंने अपनी नौकरी से जुड़े संघर्ष और भावुक पलों को साझा किया।
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संवाद कार्यक्रम में महिला पुलिसकर्मी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बरेली जिले में महिला पुलिसकर्मियों ने बेटियों की सुरक्षा का जिम्मा उठाया है। नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनों से दूर भले रहती हों, लेकिन ड्यूटी से नागरिकों की सेवा का सुकून मिलता है। जिले में महिला पुलिस की कई विंग अलग-अलग नामों से सक्रिय है, जिसमें एंटी रोमियो स्क्वायड सबसे प्रभावशाली रही है। इसके बाद मिशन शक्ति ने भी महिला सुरक्षा व जागरूकता की बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधो पर ली है। जिसकी अगुआई भी महिला पुलिसकर्मी कर रही हैं।

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शारदीय नवरात्र पर अमर उजाला कार्यालय में बृहस्पतिवार को आयोजित संवाद में पुलिस महकमे के विभिन्न इकाइयों से महिला पुलिसकर्मी पहुंचीं। जहां उन्होंने अपनी नौकरी से जुड़े संघर्ष और भावुक पलों को साझा किया। महिला पुलिसकर्मियों ने बताया कि पुलिस की ड्यूटी केवल कुछ घंटों तक सीमित नहीं होती। जो ट्रेनिंग पुरुषों को मिलती है, वही ट्रेनिंग महिला पुलिसकर्मियों को भी दी जाती है। इसलिए हमारी ड्यूटी हमारा अभिमान है।

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बारादरी थाने की एसआई संगीता ने बताया कि महिला पुलिसकर्मियों की पहली प्राथमिकता महिलाओं की सुरक्षा है। इसके कई स्थानों पर टीमें सक्रिय की हैं। पहले की तुलना में स्थितियां बदली हैं। ट्रैफिक पुलिस में कार्यरत कांस्टेबल पूजा तोमर ने कहा पुलिस की नौकरी शुरू करने के साथ ही हमारी वचनबद्धता शुरू हो जाती है। 

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ऑपरेशन सिंदूर ने बदली महिलाओं के प्रति समाज की सोच 
महिला थाने में कार्यरत पुष्पांजलि ने बताया कि पुलिस में काम करना दोनों बहनों का बचपन से सपना रहा था। पिता शिक्षक थे, जो पूरी तरह से हमारे सपनों पर भरोसा था, वही भरोसा हमें पुलिस कर्तव्यों में भी दिखाने का मौका मिला है। एसओजी सिपाही प्रमिला ने बताया कि बीते दिनों हमारी एसओजी टीम ने एक गोपनीय सूचना के आधार पर अफीम का रैकट पकड़ा। कई बार लोग महिला पुलिसकर्मियों को कम आंकते हैं, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने हाल ही में महिलाओं के प्रति लोगों की सोच बदली है।

कई महिला पुलिसकर्मियों ने अपने पारिवारिक अनुभव साझा किए, जिसमें ताउम्र अपने परिवार को समय न दे पाने की चुनौती रहती है। लेकिन अपने कर्तव्य निभाने से संतुष्टि भी होती है। एक पुलिसकर्मी ने बताया कि अधिकांश कर्मियों के बच्चे अलग रह रहे हैं, पति अलग शहर में हैं, इससे ज्यादातर त्योहार हमें वीडियो कॉल पर ही मनाने होते हैं। 

एक अन्य पुलिस कर्मी ने बताया कि परिवार में यदि किसी की मृत्यु हो जाती है तो तुरंत छुट्टी नहीं मिल पाती। ऐसे में हम केवल सब्र कर सकते हैं। क्योंकि देश सेवा सर्वोपरि है। इन दौरान एसआई संगीता, किरन, शालू पवार, प्रमिला, नियति, वैशाली, अलका, हेड कांस्टेबल मंजीत, गायत्री, निशू चौधरी, वैशली, रितेश आदि उपस्थित रहीं।

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