पालनपुर से और 1540 श्रमिकों को लेकर पहुंची ट्रेन
तीन घंटे देरी से पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन में 22 मजदूर थे बरेली के, तीन को किया गया क्वारंटीन
बरेली। गुजरात के पालनपुर से श्रमिकों लेकर एक ओर स्पेशल ट्रेन तीन घंटे देरी से सोमवार पूर्वान्ह 11 बजे बरेली जंक्शन पहुंची। इस ट्रेन से आए सभी 1540 श्रमिकों की प्लेटफार्म पर डॉक्टरों ने थर्मल स्कीनिंग की। इसके बाद उन्हें सरकुलेटिंग एरिया में खड़ी रोडवेज बसों में बैठाकर घर रवाना किया गया। बाद में खाली ट्रेन को सैनिटाइज कर वापस भेज दिया गया। इन श्रमिकों में 22 बरेली के थे। तीन श्रमिकों के कोरोना संदिग्ध मिलने पर उन्हें हरूनगला शेल्टर होम में क्वारंटीन किया गया है।
पालनपुर से सोमवार को पहुंचे श्रमिकों में 1181 वयस्क और 359 बच्चे शामिल थे। ट्रेन को सुबह नौ बजे जंक्शन पर पहुंचना था, लेकिन ड्राइवर और गार्ड की ड्यूटी बदलने के लिए कई स्टेशनों पर ठहराव की वजह से ट्रेन तीन घंटे लेट हो गई। आरपीएफ और जीआरपी ने कोच खोलकर यात्रियों को बाहर निकाला। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद सभी श्रमिकों को खाना और पानी दिया गया।
ज्यादातर उत्तर प्रदेश के थे श्रमिक
बरेली। सोमवार को पालनपुर से आए श्रमिकों में बिजनौर, अंबेडकरनगर, कानपुर, जालौन, औरेया, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत, अलीगढ़, लखीमपुर, प्रयागराज, रामपुर, बरेली, हरदोई, गोरखपुर और सीतापुर आदि जिलों के श्रमिक थे। कुछ श्रमिक बिहार और राजस्थान के भी थे। सभी को रोडवेज बसों से उनके घर भेजा गया। मजदूरों को भेजने के लिए प्रशासन ने 50 बसों की व्यवस्था की थी।
मेडिकल टीम के पास नहीं थे ग्लब्स
बरेली। जंक्शन पर जिला अस्पताल की आठ मेडिकल टीमें मजदूरों की थर्मल स्क्रीनिंग के लिए लगाई गई थीं, लेकिन टीमों में शामिल डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ बिना ग्लब्स के ही स्क्रीनिंग कर रहे थे। पूछने पर एक डॉक्टर ने बताया कि ग्लब्स उपलब्ध ही नहीं कराए गए। एसीएमओ डॉ. आरएन गिरि ने कह दिया कि ग्लब्स खत्म हो गए हैं।
दिव्यांगों को नहीं मिली व्हीलचेयर, घिसटते हुए बसों तक पहुंचे
टीटीई ऑफिस में दिव्यांगों के लिए दो व्हीलचेयर रहती हैं। पालनपुर से आए श्रमिकों में कई दिव्यांग भी थे, लेकिन उन्हें व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं कराई गईं। इससे दिव्यांगों का कोच से उतरना मुश्किल हो गया। किसी तरह से साथी श्रमिकों ने उन्हें उतारा। इसके बाद दिव्यांग प्लेटफार्म से किसी तरह घिसटते हुए सरकुलेटिंग एरिया में खड़ी बसों तक पहुंचे।