कुपोषण मुक्ति के अभियान की रणनीति पर चर्चा करने के लिए विकास भवन में हुई कार्यशाला में गांव गोद लेने वाले अफसरों ने सवाल उठाया- बगैर बजट के कैसे कुपोषण मिटाएं? शासन से चूंकि अब तक कोई बजट नहीं मिला है इसलिए सीडीओ शिवसहाय अवस्थी ने अफसरों से सामाजिक सहभागिता से कुपोषण के खिलाफ लड़ने को कहा।
सीडीओ ने बताया कि अपने गोद लिए गांव में उन्होंने अति कुपोषित बच्चों के लिए दूध का इंतजाम करने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान को सौंप दी है। इसी तरह बाकी अफसरों को भी लोगों से सहयोग लेना चाहिए। सीडीओ ने कहा कि डीएम प्रयास में जुटे हैं। सामाजिक संस्थाओं से भी मदद मांगी गई है। जल्द ही कई बड़ी संस्थाएं इस अभियान में जुड़कर सहयोग देंगी। जिले को कुपोषण मुक्त कर जल्द ही हम सब इसे मॉडल बरेली बना लेंगे।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में ज्यादा अति कुपोषित बच्चों वाले गांव को गोद लेने वाले जिला और ब्लाक स्तर के लगभग डेढ़ सौ अफसर शामिल हुए। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश कुमार ने स्लाइड के जरिए कुपोषण, उसके कारण और बच्चों के मानसिक, शारीरिक विकास के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। सीएमओ डॉ. विजय यादव ने परिवार नियोजन पर जोर देते हुए कहा कि दो बच्चों के जन्म में कम अंतर और अधिक बच्चों का होना भी कुपोषण का बड़ा कारण है।