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सेना में फर्जी दस्तावेजों से भर्ती का मामला ः मेरठ के आदेश गूजर का है ये गैंग

Sat, 03 Jan 2015 10:56 PM IST
बरेली
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सेना में फर्जी प्रमाण पत्रों से भर्ती के मामले में प्रारंभिक पड़ताल में पता चला है कि इस सब के पीछे मेरठ का एक संगठित गिरोह है जो पहले ही सेना भर्ती में इसी तरह का खेल कर चुका है। उस गैंग का सरगना मेरठ के जानी थाने के अंतर्गत पड़ने वाले डूंगर गांव का आदेश गूजर है। आदेश भर्ती के दौरान शहर के एक होटल में आकर ठहरा था। ताजा मामले की विवेचना के क्रम में पुलिस आदेश के गांव से भी लौट आयी है। वहां पता चला कि वह पहले भी फर्जी मामलों में पकड़ा जा चुका है और गांव से अपनी जमीन बेच कर जा चुका है। सेना से रिटायर सूबेदार मेजर आदित्य के साथ ही उसके गैंग में और भी लोग हैं, इनमें एक बरेली के मीरगंज क्षेत्र का भी है। बरेली में फर्जी प्रमाणपत्र उसी ने बनवाए थे। मिलिट्री इंटेलीजेंस भी इस गैंग के लोगों को तलाश कर रही है।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार बेरोजगार युवकों को नौकरी दिलाने के नाम पर यह गैंग करोड़ों रुपये कमा चुका है। सेना के जिस मुख्यालय पर भर्ती होने की सूचना मिलती है, वहां लड़कों के बीच अपने गुर्गे छोड़कर वह उन्हें अपने जाल में फंसा लेता है। बरेली में पकड़े गए बारह लड़कों के फर्जी प्रमाणपत्र उसी ने बनवाए लेकिन सत्यापन के दौरान उसका फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। मेरठ, फतेहगढ़, लखनऊ आदि सेना के सेंटरों से मुकदमा लिखने के बारे में पता कराया जा रहा है।
भर्ती बोर्ड के निदेशक ने कर्नल राजीव दीक्षित ने 30 दिसंबर 2014 को मूल निवास प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर बारह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज क राया था। मूल निवास प्रमाण पत्रों के आधार पर  बरेली, लखीमपुर, पीलीभीत, बदायूं में इनके पतों की तस्दीक कराई गई, लेकिन किसी ने लड़कों के वहां रहने की पुष्टि नहीं् की। दरअसल ये लड़के भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ही हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी होनी बाकी है।
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पहचान पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस भी फर्जी
-विवेचक रामरतन यादव ने बताया कि आदेश गूजर सेना इंटेलीजेंस की नजरों से बचकर भर्ती के दिनों में उन्हीं शहरों में पहुंच जाता है, जहां भर्ती होती है। यहां भी सेना भर्ती के दौरान उसने यही किया। सेना भर्ती में आने वाले लड़कों के उसने मूल प्रमाण पत्र ही नहीं मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड भी फर्जी बनवा दिए।
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