जिले से कुपोषण का दाग मिटाने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। तीन महीने में 10 किलोग्राम वजन बढ़ाने वाले न्यूट्रिएंट सप्लीमेंट चिन्हित कुपोषित बच्चों को देने की योजना बनी है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्व होंगे। यह पेस्ट रूप में टोमेटो सॉस की तरह होगा और पाउच में बंटेगा। रोजाना एक या डेढ़ पाउच संबंधित बच्चे को भोजन या नाश्ते के साथ देना होगा।
जिला स्वास्थ्य समिति की सोमवार को कलेक्ट्रेट में डीएम संजय कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुपोषण और बाल पुष्टाहार की सच्चाई आंकड़े के मार्फत सामने आई। जिले में करीब 5300 बच्चे कुपोषित मिले हैं। 282 गांवों में पांच या इससे अधिक संख्या में बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। इन गांवों से कुपोषण मिटाने के लिए इन्हें जिला स्तरीय अधिकारियों से लेकर एसडीएम, बीडीओ और खंड शिक्षा अधिकारी तक को गोद देने का फैसला लिया गया। इसी हफ्ते करीब 150 ऐसे गांवों को गोद लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। गोद लिए जाने वाले गांवों की सूची जिला कार्यक्रम अधिकारी के मार्फत प्रशासन ने तलब की है। इन गांवों में चिन्हित कुपोषित बच्चों को दिए जाने वाले न्यूट्रिएंट सप्लीमेंट को दिल्ली की निर्माता कंपनी से मंगाकर परीक्षण कराया जा चुका है।
भोजन की क्वालिटी जांचेंगे सीडीओ-सीएमओ
बरेली (ब्यूरो)। सोमवार को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम संजय कुमार ने सीडीओ और सीएमओ को जिला अस्पताल (पुरुष और महिला दोनों) में मरीजों को दिए जाने वाले नि:शुल्क भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच करने - कराने को कहा। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष अभी तक सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र आदि में कुल 39632 प्रसव कराए गए हैं। यह लक्ष्य के सापेक्ष 50 फीसदी है। जननी सुरक्षा योजना के तहत 21851 लाभार्थियों को मुफ्त में उनके घर पहुंचाया गया। लाभार्थियों और आशा को कुल चार करोड़ 21 लाख 32 हजार 100 रुपये दिए गए। बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत अब तक कुल 6384 स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों पर 372574 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा चुका है। टीकाकरण की प्रगति धीमी मिलने पर डीएम ने रोष प्रकट किया। बैठक में सीडीओ शिव शहाय अवस्थी, सीएमओ डा. विजय यादव, एडीएम सिटी आलोक कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश कुमार, डा. मनोज शुक्ला, बीएसए देवेंद्र स्वरूप, डीआईओएस आशुतोष भारद्वाज आदि शामिल थे।