नेताओं पर कसा तंज
नेताओं की पद लोलुपता पर चोट करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसा कौन राजा मिलेगा जो सत्ता-सिंहासन छोड़कर वन गमन कर जाए। राम इसका उदाहरण हैं। राम सिर्फ अयोध्या में रहते तो राजकुमार से अवधपति बनते, लेकिन वन गमन के बाद वह मर्यादा पुरुषोत्तम बने। इस्लाम को मानने वालों की ओर मुखातिब होकर उन्होंने सुल्तानपुर के कवि शमशी मीनाई की 1950 में लिखी गई कविता सुनाई।
कविता के बोल थे- मैं राम पर लिखूं मेरी हिम्मत नहीं है, तुलसी और वाल्मीकि ने कुछ छोड़ा नहीं। इसके बाद बोले- जगह बदलने से रिश्ते नहीं बदला करते। धर्म बदलने से पुरखे नहीं बदला करते। पुरखे एक थे। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, एमएलसी महाराज सिंह मौजूद रहे। राधारानी सेवा ट्रस्ट की ओर से पूर्व विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल अपनी पूरी टीम के साथ व्यवस्था में डटे रहे।
हैरी पॉटर की जगह राम चरित मानस से सीखें बच्चे
कुमार विश्वास ने राम से जुड़े तमाम प्रसंग सुनाते हुए शिक्षा व्यवस्था पर तीखी चोट की। उन्होंने कहा कि पिछले पंद्रह वर्ष में जो कहानियां इस देश में पढ़ाई और सुनाई गई हैं, वे पुरुषार्थहीनता की हैं। मैंने बचपन में जो कहानियां सुनी थीं, वो छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्मी बाई, प्रह्लाद, ध्रुव और गुरुगोविंद सिंह के चार बलिदानी बेटों की थीं।
उन्होंने कहा कि हैरी पॉटर की कहानी में चमत्कार है। राम के जीवन में पुरुषार्थ है। पूरे विश्व में पिछले दस वर्ष में फिल्मों, टीवी और किताबों के माध्यम से हैरी पाटर की कहानी ने भारत के संपूर्ण बजट के बराबर पैसा कमाया है। बच्चों को रामचरित मानस से सीखने की जरूरत है।