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कोडवर्ड से हो रहा शहर में अवैध टेंपो का संचालन

Mon, 26 Sep 2016 01:07 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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टेंपो पर पड़ा कोडवड।
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शहर में अवैध तरीके से चलने वाले डीजल टैंपो ट्रैफिक पुलिस की शह पर चल रहे हैं। ठेकेदार ट्रैफिक पुलिस को प्रति टैंपो पैसा देने के लिए बाकायदा बोली लगाते हैं। पहले पंडित जी मानपुर वाले अपने नाम से (पीएम) कोड वर्ड लिखवाकर टैंपो चलवा रहे थे। वह ट्रैफिक पुलिस को 20 टैंपो चलवाने के लिए तीन हजार रुपये महीना दे रहे थे। इसी बीच नया ठेकेदार आ गया। उसने चार हजार की बोली लगा दी। ट्रैफिक पुलिस ने नए ठेकेदार को चार हजार में 30 टैंपो चलवाने का ठेका दे दिया। इस ठेकेदार के टेंपो के आगे और पीछे भोले बाबा (बी.बी) कोड लिखा है। बी.बी कोड वर्ड वाले टैंपो को ट्रैफिक पुलिस वाले किसी चौराहे पर चेक नहीं करते। यह खुलासा हुआ है टेंपो यूनियन के एक पदाधिकारी और ट्रैफिक पुलिस के सिपाही के बातचीत के आडियो से। 
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एआरटीओ दफ्तर से डीजल टैंपो और आटो रिक्शा के परमिट 3+1 में स्वीकृत होते हैं। नियमानुसार शहर के अंदर डीजल टैंपो या आटो नहीं चलने चाहिए। लेकिन ट्रैफिक पुलिस परसाखेड़ा की एजेंसी से मिलकर ऐसे टैंपो सीएनजी की आड़ में चलवाती है। सीएनजी और डीजल टैंपो देखने में एक जैसे लगते हैं। स्टार्ट करने पर इनकी आवाज में फर्क देखा जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि ट्रैफिक पुलिस ने रजिस्ट्रेशन वाले टैंपो चालकों से प्रति टैंपो 500 और बिना रजिस्ट्रेशन वाले चालकों से 1000 और ईंट भट्ठे से शहर के अंदर ईंटें या रेत लाने वाले ट्रैक्टर ट्राली चालकों से 180 रुपये प्रति ट्राली के हिसाब से वसूली के रेट बांध रखे हैं। सेटेलाइट से लेकर शहामतगंज, चौपुला, कचहरी, जंक्शन, पटेल चौक से लेकर शहरी सीमा में 32 टैंपो स्टैंडों पर अलग-अलग ठेकेदार प्रति चालक से वसूली कर रहे हैं। विभिन्न चौराहों पर ड्यूटी पर खड़े ट्रैफिक पुलिस के सिपाही डीजल या बिना रजिस्ट्रेशन वाले टैंपो और आटो को कोड वर्ड लिखा देखकर छोड़ देते हैं। आटो रिक्शा यूनियन के एक पदाधिकारी के अनुसार आटो या टैंपो चालकों से केवल ट्रैफिक पुलिस ही नहीं, बल्कि चीता मोबाइल और संबंधित थानों की पुलिस भी अपने ड्राइवरों के जरिए वसूली करवाती है। सेटेलाइट पर टैंपो चालक चौराहे के किनारे खड़े होने वाले जलजीरा के ठेला मालिक को पूरे दिन पैसे देते रहते हैं। यह जलजीरा का ठेला ही वसूली का अड्डा है। 
जिसके टैंपो का चालान कर दो, वही वसूली का आरोप लगाने लगता है। हमें तो ये कोड वर्ड लिखा टैंपो दिखा नहीं। हो सकता है कि दो चार टैंपो ऐसे कोड वर्ड लिखे चल रहे हों। मुझे मिल गए तो मैं उनको छोड़ूूंगा नहीं। शहर के अंदर डीजल टैंपो या आटो नहीं चलने दिए जाएंगे। मनोज कुमार, टीएसआई  
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