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चार और किसानों ने खोया हौसला

Fri, 08 May 2015 01:28 AM IST
बरेली
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बर्बाद फसल के सदमे और कर्ज में डूबे किसानों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। बुधवार रात चार और किसानों ने दम तोड़ दिया।
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भोजीपुरा के न्योधना के बलवीर के छोटे बेटे 45 वर्षीय राजेश कुमार बुधवार को खेत पर गए थे। थ्रेसिंग के दौरान गेहूं के दाने नहीं निकले तो वह घर लौट आए। बेचैनी की शिकायत की और रात में दम तोड़ दिया। बड़े भाई सतीश ने बताया कि 12 बीघा गेहूं बर्बाद हो गया था। राजेश की बेटी राधा की 19 को बारात आनी थी मगर फसल बर्बादी के कारण शादी रुकवा दी थी। अधकटा ब्रह्मनान में 50 साल के लेखराज को भी पांच बीघा फसल बर्बाद होने का सदमा लगा और दम तोड़ दिया।  पत्नी माया देवी ने बताया कि दो लाख रुपये साहूकार से लिए थे। इस कारण वह परेशान रहते थे।
 फतेहगंज पश्चिमी के माधौपुर गांव के 70 वर्षीय पीतमलाल को खेत में ही हार्टअटैक पड़ा। 18 बीघा खेत में सिर्फ आठ क्विंटल गेहूं निकलने पर वह गश खाकर गिर गए। पीएचसी से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पीतमलाल को फसल का मुआवजा नहीं मिला है। हालांकि लेखपाल ने बताया कि 33 फीसदी फसल नुकसान वाले लाभार्थी किसानों की दूसरी सूची में पीतमलाल का नाम भी भेजा गया है। पीतमलाल पर बैंक ऑफ बड़ौदा की फतेहगंज पश्चिमी शाखा से 50 हजार और कुछ लोगों का 45 हजार रुपये कर्ज भी है।
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भमोरा के हर्रामपुर के 53 साल के रामकिशोर ने गांव के कुंवर पाल की 18 बीघा जमीन पेशकी पर ली थी लेकिन सिर्फ 12 क्विंटल गेहूं निकलने से वह परेशान हो गया। बताया जा रहा है कि रामकिशोर ने खेत मालिक से अगले साल गेहूं लेने का आग्रह किया था मगर उसकी इस अपील को कुंवर पाल ने नहीं माना। घर वालों ने बताया कि बुधवार शाम छह रामकिशोर ने बेचैनी की शिकायत की तो उन्हें बल्लिया ले जाया गया मगर वहा पहुंचते ही उनकी मौत हो गई।
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दूसरी खबर
तहसीलदार ने डांटा तब पहुंचा लेखपाल
व्यौधा गांव में किसान की खुदकुशी का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
शेरगढ़। व्यौधा गांव में किसान राजू मौर्या की खुदकुशी पर तहसील प्रशासन बृहस्पतिवार को हरकत में आया। तहसीलदार की डांट के बाद लेखपाल और कानूनगो किसान के घर पहुंचे और मुआवजे की सिफारिश की। तहसीलदार ने किसान के घर वालों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत सहायता देने की बात कही है।
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राजू मौर्या ने आर्थिक तंगी के कारण बुधवार अपराह्न शराब में जहर मिलाकर पी लिया था। उसकी मौत की सूचना के बाद भी राजस्व कर्मी गांव नहीं पहुंचा था। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने लेखपाल की अनदेखी को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो डीएम ने तहसीलदार से जवाब तलब किया था। इसके बाद तहसीलदार ने लेखपाल की क्लास ली तो वह कानूनगो के साथ किसान के गांव पहुंचे। दोनों ने पुलिस को बुलाया और शव का पंचनामा भरा गया।
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