बर्बाद फसल को देखकर किसानों के हौसला खोने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को चार और किसानों ने दम तोड़ दिया। मरने वालों में फतेहगंज पश्चिमी का 60 वर्षीय नन्हूं खां भी शामिल है। वह सोमवार को भिटौरा रेलवे फाटक के पास सियालदह एक्सप्रेस के आगे कूद गया था। बहेड़ी तहसील में दो और सदर तहसील में एक किसान की मौत हुई।
डेढ़ एकड़ में निकला सिर्फ पांच क्विंटल गेहूं
टांडाछंगा। भैसिया गांव के 55 वर्षीय अब्दुल नवी को बर्बाद फसल और कर्ज ने परेशान कर दिया था। इस बार डेढ़ एकड़ जमीन में बोए गेहूं में से उसके हिस्से सिर्फ पांच क्विंटल फसल आई। खेत में ही हार्टअटैक पड़ने से उसकी मौत हो गई। घर वालों ने बताया कि उसने ओबीसी बैंक की किच्छा शाखा से डेढ़ लाख का कर्ज लिया था। सूदखोरों का भी 30 हजार का कर्ज था। घर के मुखिया की मौत से कोहराम मचा हुआ है। कारवां संस्था के संयोजक नवाब राशिद खां मृतक के घर पहुंचे और ढांढस बंधाया।
बर्बाद फसल और कर्ज में डूबा था भागीरथ
शेरगढ़। पनवड़िया गांव के 55 साल के भागीरथ ने इस साल करीब एक एकड़ जमीन में गेहूं की फसल लगाई थी। मढ़ाई के बाद सिर्फ एक क्विंटल गेहूं देख वह बेचैन हो गया। घर वाले इलाज के लिए बरेली ले गए। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। भागीरथ ने पनवड़िया ग्रामीण बैंक से एक लाख पांच हजार रुपये का कर्ज लिया था। उसकी बीस बीघा जमीन पिछले साल किच्छा नदी में आई बाढ़ के चलते नदी कट गई थी। इस बार गेहूं ने भी धोखा दे दिया था।
नुकसान से टूट गया था बुधसेन
अलीगंज। सूदनपुर गांव के 54 वर्षीय बुध सेन को बर्बाद फसल ने तोड़ दिया था। 10 बीघा जमीन में एक क्विंटल गेहूं न निकलने पर वह परेशान रहने लगे। टेंशन में थे इसलिए बेटा अपने साथ पंजाब ले गया। वहां भी मन नहीं लगा तो घर आ गए। मंगलवार को खेत में गए थे। वहां अचानक गश खाकर गिर गए। घर वाले बरेली ले गए मगर रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। पत्नी जशोदा देवी ने बताया कि घर वाले उन्हें हिम्मत बंधाते रहे। अगली फसल में भरपाई होने की बात कहते रहे मगर उनका टेंशन कम नहीं हुआ। चार बेटों राजेंद्र, गंगाराम, विजेंद्र और चरन सिंह में तीनों की शादी हो गई है।
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नोट :: ट्रेन के आगे कूदने वाले किसान की मौत की खबर सिटी से मिलेगी-