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बर्बाद फसल देख खेत पर रोते थे हबीब

Tue, 14 Apr 2015 02:07 AM IST
बरेली
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बक्सरिया मोहल्ले के 55 वर्षीय किसान हबीबउल्ला  जब भी खेत पर जाते थे तो वहां गेहूं की बर्बाद फसल देख फफक कर रोते थे। ये देख आसपास वाले कुदरत की मर्जी को कौन टाल सकता है बात कहकर उन्हें समझाते थे। चार दिन पहले 16 बीघा खेत में कुल सवा क्विंटल गेहूं निकलने पर हबीब का धैर्य जवाब दे गया और तनाव में आकर उन्होंने खुदकुशी कर ली।
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पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद भतीजे जावेद ने बताया कि हबीब की जिंदगी वैसे ही तंगहाल में गुजरी है। छह बेटियों की शादी करने में उनकी अपनी दस बीघा जमीन पहले ही बिक चुकी है। इसके बाद वह परिवार के गुजर बसर के लिए बटाई पर जमीन ले लेते थे। इस पर उन्होंने चार हजार रुपये बीघा के हिसाब से 18 बीघा खेत बटाई पर लिया था। दो हजार रुपये बीघा के हिसाब से लागत लगाई। इस कारण उन्हें साहूकारों से करीब तीन लाख कर्ज लेना पड़ा।  खेती के लिये अपनी पत्नी के जेवर एक सर्राफ की दुकान पर गिरवी रख कर करीब 45 हजार रुपये का कर्ज ले लिया। इसको चुकाने के लिए उगने वाली फसल ही आसरा थी, लेकिन बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि से फसल बर्बाद हो गई। साहूकार का कर्ज चुकाने की उन्हें चिंता सताने लगाने लगी। जावेद का कहना है कि इसी तनाव में हबीब ने सोमवार सुबह ट्रेन से कटकर खुदकुशी कर ली। जावेद ने बताया कि इससे पहले हबीब की दस बीघा आलू की फसल भी बर्बाद हो गई थी।
घर वालों ने बताया कि सुबह करीब ग्यारह बजे वह खेत पर गया और गुमसुम बैठे गए। इसके बाद खेत के पास से गुजर रही रेल लाइन की ओर बढ़ गए और जान दे दी।
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फोटो हैं
नींद में भी एक लाख की रट
आंवला। ब्लाक आलमपुर जाफराबाद के गांव टांडा गांव के राजवती को कर्ज का ऐसा सदमा लगा कि वह रविवार शाम नींद में भी एक लाख कर्ज की बात बड़बड़ाती रही। भतीजे शिवकुमार ने बताया कि वह एक ही बात कहती थी कि बैंक ऑफ बड़ौदा का एक लाख का कर्ज चुकता होगा। यह भी कहा कि इलाज में पैसा बर्बाद मत करो बैंक और अन्य देनदारी की चिंता करो। घर में कोहराम मचा हुआ है।  पति मुन्नालाल की तेईस बीघा जमीन में बोया गेहूं बर्बाद हो गया है। उसके तीन बेटे जगत सिंह, संजीव, नितिन और एक बेटी प्रीति है। तहसीलदार मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि राजवती की मौत डायरा से हुई है। पति मुन्नालाल का नाम मुआवजा सूची में पहले से ही शामिल है।
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फोटो
कर्ज और बारिश से बर्बाद हो गया पूरनलाल
फतेहगंज पूर्वी। निवाडिया गांव का पूरन लाल श्रीवास्तव उर्फ  लाला को कर्ज और बारिश से हुए नुकसान ने सदमे में डाल दिया। 20 बीघा गेहूं पूरी तरह बर्बाद हो गया था। उस पर बैंक ऑफ बड़ौदा की स्थानीय शाखा से डेढ़ लाख और सहकारी समिति से करीब 10 हजार की देनदारी भी थी। सोमवार को वह खेत से लौट रहा था अचानक सदमा लग गया। अब छह मासूम बच्चों के परवरिश की जिम्मेदारी सौतेली मां दुर्गावती पर आ गई है। दुर्गावती की संतान न होने पर पूरनलाल ने माधुरी से दूसरी शादी की थी मगर एक साल पहले उसकी मौत हो गई। सबसे बड़े बेटे शिवप्रसाद की उम्र 14 साल है जबकि सुनील दस साल, बंटू आठ साल और सुमित छह साल का है। बेटी मिथिलेश 12 और विमला तीन साल की है। ग्रामीणों का कहना है कि लेखपाल सर्वे के लिए आया था मगर उसने सही सर्वे नहीं किया।
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फोटो पी एच 01-मृतक का फाइल फोटो।
पी एच 02-विलाप करते परिजन।
चार बीघा में निकला सिर्फ दो क्विंटल गेहूं
क्योलड़िया। क्योलड़िया के अब्दुलगनी के 50 वर्षीय बेटे हनीफ रविवार की रात लगभग नौ बजे चार बीघा खेत से गेहूं की फसल लाया था। घर आकर सिर्फ दो क्विंटल गेहूं की पीड़ा उसने परिवार वालों के सामने व्यक्त की थी। रात 11 बजे अचानक बेचैनी होने लगी। घर वाले प्राइवेट डॉक्टर को बुलाकर लाए मगर उसे बचाया नहीं जा सका। पत्नी ललिया बेगम ने बताया कि पूरी फसल को ओले और बारिश ने मार दिया था। सुबह एसडीएम रजनीश राय गांव पहुंचे और घर वालों को पारिवारिक लाभ व अन्य मदद दिलाए जाने का आश्वान दिया। हनीफ राजमिस्त्री भी था और साथ में ही अपनी इस थोड़ी सी जमीन में खेती करता था।
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