समाजवादी पेंशन योजना, वृद्धावस्था और विधवा पेंशन, छात्रवृत्ति, पारिवारिक लाभ योजना आदि सरकारी लाभ वाली तमाम योजनाओं में धांधली के आरोपों के बाद जांच में घिरे लेखपालों ने लगता है इतने किसानों की मौत के बाद बर्बाद फसलों के सर्वे में भी संजीदगी नहीं दिखायी।ग्राउंड रिपोर्ट के लिए गावों में गई अमर उजाला टीम के सामने कई किसानों ने ऐसी शिकायत की। मंगलवार को कलक्ट्रेट के कंट्रोल रूम के फोन पर लगातार एक ही शिकायत गूंजती रही- साहब बर्बाद तो हम भी हुए हैं, हमें तो पता नहीं सर्वे भी हुआ है। हमारे पास तो कोई नहीं आया। इसी तरह की शिकायतें जिले की छह तहसीलों में तहसील दिवस के दौरान भी सुननेे को मिलीं।
मंगलवार सुबह 10 बजे एडीएम वित्त (एवं राजस्व) का कार्यालय खुलते ही कंट्रोल रूम का फोन घनघनाने लगा। शाम पांच बजे तक 64 शिकायतें दर्ज हुईं, इनमें से करीब 80 फीसदी किसानों का कहना था कि लेखपाल उनके गांव में नहीं पहुंचे और कागजों में सर्वे दिखा दिया है। सर्वे कब हुआ और किसने किया, गांव वालों को पता ही नहीं है। कुछ ने प्रधान के घर पर बैठकर ही सर्वे करने के आरोप लगाए हैं।
कंट्रोल रूम में फोन के माध्यम से दर्ज हुईं 64 शिकायतों में से 45 तो लेखपालों के गांवों में सर्वे के लिए न आने की रही हैं। मान सिंह इस्लमाइलपुर के प्रधान जमील अहमद ने तो अपने गांव के साथ-साथ बालपुर और उलेहतापुर मजरों में रहने वाले किसानों के खेतों का सर्वे न करने के आरोप लेखपाल पर लगाए हैं। ऐसे ही आरोप खेड़ा सदर के बसीमुद्दीन, नवेदिया रघुनाथ (नवाबगंज) के सियाराम व शहादत अली के हैं। शाही के राम किशोर, बिसारतगंज के कुलदीप शर्मा, शहवाजपुर आंवला की लीलावती, नवाबगंज के परमजीत सिंह, सिमरावा के खुर्शीद और इनायत अली, सिंधौली के कोमल प्रसाद, आनंदपुर आंवला के फतह सिंह, नवाबगंज के मोहन सिंह, रसूलपुर (मीरगंज) के प्यारेलाल वर्मा, शेखापुर फरीदपुर के सुरेश शुक्ला आदि ने भी लेखपालों के गांव में बिना पहुंचे बारिश से क्षतिग्रस्त फसलों का सर्वे करने की रिपोर्ट देने की शिकायत की है।
रुपये मांगने का आरोप
उमरसिया के ध्यान पाल सिंह ने लेखपाल पर सर्वे में अधिक क्षति दिखाने की एवज में रुपये मांगने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर अधूरे सर्वे के आरोप मुड़िया नसीर गांव के शाहरुख रहमान ने लगाए हैं। बबूरा (नवाबगंज ) के रहने वाले रवींद्र मिश्रा ने लेखपाल पर प्रधान के घर बैठकर सर्वे करने की शिकायतें की हैं।
आंवला
गेहूं की खराब फसल लेकर पहुंच गए किसान
आंवला। तहसील दिवस में करीब 20 किसानों ने गेहूं फसल के नुकसान के मुआवजे की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई। पचास से ज्यादा किसान अपने शिकायती पत्र लेकर लेखपालों के पीछे घूमते दिखाई दिए। उनका आरोप था कि लेखपाल सर्वे करने नहीं पहुंच रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन ने कार्यकर्ता बर्बाद फसल लेकर तहसील दिवस पहुंच गए। उन्होंने तहसील प्रशासन पर सर्वे की मनमानी रिपोर्ट बनाने की रिपोर्ट बनाने का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया।
फरीदपुर
साहब, सर्वे के लिए हैं 100 रुपये
फरीदपु़र। तहसील दिवस में सात लोगों ने बर्बाद हुई फसल का सर्वे नहीं कराए जाने का आरोप लगाया। करतौली के मुरारी, राजेंद्र, नरवीर आदि ने शिकायत की है कि लेखपाल रिपोर्ट लगाने का 100 रुपये ले रहा है और गांव में सर्वे भी नहीं किया है। महमूदपुर के गोपाल कृष्ण ने भी आरोप लगाया है कि उनका सर्वे नहीं हुआ है। दौलतपुर निवासी राजेंद्र पाल ने आरोप लगाया कि सात बीघा गेहूं बर्बाद हो गया है मगर सर्वे करने कोई नहीं आया। ढकनी रजपुरी के रमेश यादव ने भी यही आरोप लगाया।
..........
बहेड़ी
सर्वे सही नहीं हुआ
बहेड़ी। तहसील दिवस में 20 किसानों ने मुआवजा मांगा। 50 किसान सर्वे न होने की शिकायत लेकर आए थे। वे अपने-अपने सर्किल के लेखपालों को ढूंढते नजर आए। लेखपालों ने कल सर्वे की बात पर उन्हें वापस भेज दिया। राष्ट्रीय किसान मोर्चा के राकेश गंगवार और कारवां संस्था के संयोजक नवाब राशिद खां ने फसल का मुआवजा दिलाने के लिए सही सर्वे कराने की मांग की।
.....
मीरगंज
गेहूं को गिरा हुआ दर्शा रहे लेखपाल
मीरगंज। वकील कुंवरसेन यदुवंशी और कई अन्य किसानों ने अपर आयुक्त से शिकायत की कि मीरगंज तहसील क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा से पीड़ित चार काश्तकारों की आत्महत्या या हार्ट अटैक से मौतें हो चुकी हैं। इसके बावजूद राजस्व कर्मी बर्बाद हुई फसलों का स्थलीय सर्वे करने में गंभीर लापरवाही बरत रहे हैं। लेखपाल सर्वे में गेहूं को नष्ट होने के बजाय गिरा हुआ दर्शा रहे हैं। जनजागृति मंच कार्यकर्ताओं ने भी प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग की।
नवाबगंज
हर किसान को मिले मुआवजा
नवाबगंज। भाकियू के तहसील अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश गंगवार, रामऔतार, करतार सिंह, तुलाराम और चिरंजीव लाल आदि ने लेखपालों द्वारा सर्वे में मनमानी का आरोप लगाते हुए बारिश और ओलों से हुए नुकसान का मुआवजा हर किसान को दिए जाने, बटाईदार एवं ठेकेदार द्वारा बोई गई फसल का मुआवजा दिए जाने की मांग की। उन्होंने प्रदेश के हर विधायक से मुख्यमंत्री राहत कोष में एक-एक दिन का वेतन दिए जाने की भी मांग की।